न सरहद की दूरियां न दिलों की। शाही स्नान के दौरान सारे फर्क मिट गए। गोरी चमड़ी वाली युवा संन्यासिनियों ने जब चेहरे पर भभूत पोतना शुरू किया तो सनातनी संस्कृति की गहराई कोहर किसी को अहसास हुआ।
सात समंदर पार से आईं साध्वियों ने संगम में डुबकी लगाकर शाही स्नान को यादगार बना दिया। जापान, जर्मनी,कनाडा और आस्ट्रिया से आईं विदेशी साध्वियों ने नागा साधुओं के बीच शाही स्नान किया।
भस्मी पोते अड़भंगी नागाओं के साथ विदेशी संन्यासिनियों का अनूठा संगम त्रिवेणी के पावन तट पर विश्व समुदाय के लिए अविस्मरणीय बन गया। डमरू, त्रिशूल, तलवार और लाठी भांजते नागाओं के पीछे विदेशी साध्वियां भी शाही स्नान के लिए अलग-अलग शोभायात्राओं के साथ संगम पहुंचीं। संन्यासिनियों ने पुण्य की डुबकी तो लगाई ही, कुछ ने भस्मी भी पोती। इस दौरान संगम तट की छटा में चार चांद सा लग गया था।
महामंडलेश्वर विश्वेश्वरानंद के साथ दर्जन भर से अधिक विदेशी साध्वियां शाही स्नान के लिए पहुंची, तो प्रेममई साईं मां के साथ सौ से अधिक युवा संन्यासिनियां हर हर महादेव का उद्घोष करते हुए आईं। इटली, कनाडा, आस्ट्रिया, रूस, जर्मनी की विदेशी साध्वियों ने संगम में आस्था की डुबकी लगाई। परंपरागत संगम तट पर अघ्र्य देकर अपने-अपने गुरुओं का आशीर्वाद लिया। पायलट बाबा के भी साथ विदेशी साध्वियां चल रही थीं।
यूनिवर्सल मदर के नाम से मशहूर जापान से आईं पायलट बाबा की शिष्या योगमाता केइको आईकावा के साथ भी सौ से अधिक जापानी, कोरियन संन्यासिनियों और शिष्याओं ने संगम में डुबकी लगाकर आस्था के रंग को गाढ़ा किया। कोइको ने अमर उजाला से बाचतीत में कहा कि यह समागम पूरी दुनिया के लिए खास और संदेश परक है। इस कुंभ से पूरे विश्व में मानवता और सेवा का संदेश अनुकरणीय बन गया है।