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Mahakumbh Stampede: आंखों से बहते आंसू, बदहवास परिजन...अपनों की तलाश

Wed, 29 Jan 2025 08:59 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, महाकुंभ नगर (प्रयागराज)
अमर उजाला नेटवर्क, महाकुंभ नगर (प्रयागराज) Published by: विनोद सिंह Updated Wed, 29 Jan 2025 08:59 PM IST
सार

मौनी अमावस्या पर संगम तट पर हादसे के बाद लाचार, बेबस और बदहवाश परिजन अपनों की तलाश में भटक रहे थे। अस्पताल दर अस्पताल, पूछताछ केंद्रों पर एक ही गुहार हमारे अपनों के बारे में बता दीजिए।

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Mahakumbh Stampede: Tears flowing from eyes, distraught family members... searching for loved ones
Mahakumbh 2025 : मौनी अमावस्या पर भगदड़ के बाद बदहवास श्रद्धालुु। - फोटो : अमर उजाला।

मौनी अमावस्या पर संगम तट पर हादसे के बाद लाचार, बेबस और बदहवाश परिजन अपनों की तलाश में भटक रहे थे। अस्पताल दर अस्पताल, पूछताछ केंद्रों पर एक ही गुहार हमारे अपनों के बारे में बता दीजिए। कोई फोटो दिखाता तो कोई हाथ जोड़ता, आंखों से झर-झर आंसू बह रहे थे। बस उम्मीद थी कि शायद कोई बता दे कि आपके अपने ठीक हैं।

केंद्रीय चिकित्सालय में एक के बाद एक एंबुलेंस की कतार लग रही थी। सायरन की आवाज गूंज रही थी। सुबह सात बजे तक लगातार घायल लाए जा रहे थे। जैसी ही कोई एंबुलेंस पहुंचती चिकित्सकों की टीम दौड़कर घेर लेती और घायल को फटाफट स्ट्रेचर के सहारे अंदर ले जाते। इसके बाद जब परिजन पहुंचे तो वह कभी पुलिसकर्मियों से तो कभी चिकित्सकों से अपनों के बारे में पूछ रहे थे।

चिकित्सालय के आसपास लोगों की भीड़ जुट गई थी। हालांकि, प्रशासनिक अधिकारी लोगों को इकट्ठा नहीं होने दे रहे थे। औरेया निवासी गुड़िया पांडेय ने बताया कि 17 साल की बेटी स्वीकृति पांडे दब गई थी। बिजली का पोल नहीं मिलता तो सभी मर जाते। छोटे बेटे को पोल पर चढ़ा दिया था, लेकिन बेटी नीचे दबी रह गई थी। इसकी वजह से उसकी हालत बहुत गंभीर हो गई। अस्पताल में चिकित्सकों से विनती की है कि वह हमें हमारी बेटी से मिलवा दें।
 

Mahakumbh Stampede: Tears flowing from eyes, distraught family members... searching for loved ones
Mahakumbh 2025 : संगम नोज पर भगदड़ के बाद बचाव कार्य में जुटे एसडीआरएफ के जवान। - फोटो : अमर उजाला।

औरेया जिला के रंजन कुमार चौहान ने बताया कि धक्का लगने के बाद मेरे पापा बिछड़ गए। कई जगह तलाश की, लेकिन पता नहीं चल पाया। लोगों ने कहा कि अस्पताल जाकर पता करिए। अब यहां पर भी कोई जानकारी नहीं मिल पा रही है।

जिला अलीगढ़ के अतरौली निवासी संजू चौधरी अपनी गोद में डेढ़ साल की बेटी सिया को लिए थे। उनकी पत्नी रूबी गंभीर रूप से घायल हो गई थी। उन्होंने कहा कि चार लोग साथ में आए थे। संगम में स्नान करने के लिए जा रहे थे कि तभी पत्नी भीड़ में फंस गई। उसे एंबुलेंस से उपचार के लिए पुलिसकर्मी लेकर आए।झारखंड के धनबाद निवासी अंजली देवी ने बताया कि मैं अपनी बेटी के साथ थी। दोनों फंस गए। मुझे हाथ और पैर में चोट लगी, लेकिन बेटी जमीन पर गिर गई। मैंने उसे बचाने के लिए खूब आवाज लगाई, लेकिन किसी ने नहीं सुनी।

Mahakumbh Stampede: Tears flowing from eyes, distraught family members... searching for loved ones
Mahakumbh 2025 : मौनी अमावस्या पर भगदड़ के बाद बेहोश महिला को बाहर निकाली पुलिस। - फोटो : अमर उजाला।

30 लोगों के नीचे दब गया था मेरा भाई : विनीत

सिरजा असम से आए विनीत पाल ने बताया कि हम चार लोग फंस गए थे। तीन लोग तो उठकर खड़े हो गए, लेकिन मेरे भाई नीति पाल के ऊपर 30 आदमी गिर जाने की वजह से वह उठ नहीं सका था। वहीं बेहोश हो गया था। जो आ रहा था बस देखकर चले जा रहे थे। दो घंटे बाद एंबुलेंस मिली। पुलिस ने हमें घाट पर ही छोड़ दिया था। रास्ता पूछ-पूछ कर अस्पताल तक पहुंचे हैं। साथ आई महिला ने बताया कि यदि समय से अस्पताल ले आते और वक्त रहते उसे इलाज मिल जाता तो मेरा भाई बच जाता।

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Mahakumbh Stampede: Tears flowing from eyes, distraught family members... searching for loved ones
Mahakumbh 2025 : मौनी अमावस्या पर भगदड़ के बाद संगम नोज पर तैनात फोर्स। - फोटो : अमर उजाला।

दो बिछड़े, एक मिल गए...जीजा लापता

चित्रकूट के ओरन निवासी चंद्रपाल गांव करौंहा निवासी अपने 62 वर्षीय बहनोई चंद्रपाल कुशवाहा को ढूंढते हुए केंद्रीय चिकित्सालय पहुंचे। उन्होंने बताया कि रात दो बजे से वह अपने बहनोई को ढूंढ रहे हैं लेकिन कोई कुछ बता नहीं पा रहा है। वह रात दो बजे स्नान करने के लिए जा रहे थे। तभी आगे से भीड़ आई और वह बिछड़ गए। उन्होंने कहा कि सात लोग साथ आए थे। दो लोग बिछड़े थे। इनमें से एक का फोन आ गया है कि वह सुरक्षित है, लेकिन हमारे जीजा नहीं मिल पा रहे हैं।

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Mahakumbh Stampede: Tears flowing from eyes, distraught family members... searching for loved ones
Mahakumbh 2025 : मौनी अमावस्या पर भगदड़ के बाद संगम नोज पर पहुंची एंबुलेंस। - फोटो : अमर उजाला।

मां मिली बेहोश, साथी का पता नहीं

सुल्तानपुर के गांव बसोही निवासी रामप्रसाद यादव ने बताया कि हम रात 12 बजे घाट पर स्नान करने पहुंच गए थे। मैंने अपनी मां और साथ की एक महिला को कपड़ों की रखवाली के लिए छोड़ दिया था और बाकी सभी नहाने के लिए चले गए थे। जब लौटकर देखा तो वह बेहोश पड़ी थी। साथ की महिला का पता नहीं चला कि वह कहां है। उसका पति छोटेलाल यादव भी उसे ढूंढ रहा है। प्रयागराज के ट्रांसपोर्ट नगर निवासी अनिकेत कंबल लपेटे ही केंद्रीय चिकित्सालय पहुंचे।उन्होंने बताया कि वह स्नान करने के लिए संगम में पहुंच गए थे और मम्मी को कपड़ों की रखवाली के लिए छोड़ा था।

लौटे तो मम्मी का पता नहीं चला। इसके बाद कई जगह ढूंढ लिए लेकिन जानकारी नहीं मिल पा रही है। छतरपुर के गांव लक्ष्मणपुरा निवासी रामकिशोर राजपूत ने बताया कि मेरा 24 वर्षीय भतीजा मुकेश स्नान कर चुका था। तभी अफरातफरी मच गई। उस वक्त हम नदी के किनारे पर थे। यदि पानी की तरफ जाते तो डूबने का खतरा था। इसलिए हमने एक-दूसरे का हाथ पकड़ लिया। लेकिन भीड़ के धक्का से हाथ छूट गया और भतीजा बिछड़ गया। कई स्थानों पर उसे तलाश नहीं पर कोई पता नहीं चल पा रहा है।

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