लॉक डाउन के बाद पहले दिन सोमवार को बाहरी इलाकों से शहर आने वालों को पूरी तरह रोक दिया गया। झूंसी, नैनी और फाफामऊ से प्रयागराज शहर में प्रवेश करने पर रोक को लेकर पुलिस से लोगों की जमकर कहासुनी हुई। नैनी पुराने पुल के पास सैकड़ों लोगों को पुलिस ने अपनी जरूरतें बताने और गुहार लगाने के बाद भी जाने नहीं किया।
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नैनी के एडवोकेट राजेश तिवारी एसआरएन में भर्ती अपनी मामी को भोजन पहुंचाने के लिए जा रहे थे, लेकिन पुलिस ने उनको पुराने पुल के पास रोक दिया। उन्होंने अस्पताल जाने देने के लिए पुलिस से बहुत आग्रह किया , लेकिन सुनी नहीं गई। इसी तरह फैजुल्लापुर हेतापट्टी निवासी क्षमा जन सेवा समिति के संचालक सुधीर कुमार मिश्रा को नैनी की गोशाला में पशुओं को चारा पहुंचाने के लिए नहीं जाने दिया गया। वहां इस सम 70 से अधिक पशु रह रहे हैं।
वह चारा लेकर घंटों झूंसी के पास फंसे रहे। सुधीर घायल पशुओं की देखरेख भी करते हैं। इनके अलावा ऐसे कई जरूरतमंदों को नैनी, झूंसी में रोक दिया गया। अंदावा से आगे वाहनों को नहीं चलते दिया जा रहा था। कुछ चार पहिया वाहनों को पुलिस जरूरतें सुनने के बाद छोड़ती भी रही।
नैनी पुराने पुल के पास दिन के 12 बजे सैकड़ों लोगों ने रास्ता रोके जाने से नाराज होकर शोर-शराबा भी किया। बावजूद इसके पुलिस ने लोगों को जाने नहीं दिया और लोग जरूरी कामों के लिए भी शहर में नहीं घुस सके। तीमारदार अपने मरीजों के लिए खाना तक नहीं पहुंचा सके। किसी को अनावश्यक सड़कों पर नहीं चलने दिया जा रहा है। इससे हर किसी के चेहरे पर चिंता का की लकीरें खिंच गई हैं।