विदेशी राम-सीता, लक्ष्मण और रावण रविवार की शाम सांस्कृतिक कुंभ में देश-दुनिया के श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण का केंद्र बने। अक्षयवट के भव्य मंच पर रूसी राम की रूप में मशहूर पद्मश्री गेनादी पेचनीकोव स्मृति मास्को की दिशा रामलीला की ओर से सीता स्वयंबर से लेकर रावण वध तक के भावों का संगीतमय मंचन हर किसी के लिए यादगार बन गया।
अक्षयवट के मंच पर शाम 5:30 बजे मास्को की रामलीला का मंचन शुरू हुआ। सीता स्वयंवर,राम का अयोध्या में प्रवेश, रानी कैकयी का कोप भवन में जाना, राम, लक्ष्मण, सीता वन गमन, सीता हरण, राम हनुमान भेंट, पंचवटी में सीता, हनुमान का लंका में प्रवेश, राम- रावण युद्ध के अलावा राम के राज्याभिषेक के भावों का मंचन रूसी कलाकारों ने किया। लीला की शुरुआत सीता स्वयंवर से हुई।
राजा जनक अपनी तीनों रानियों और योद्धाओं के साथ दरबार में विराजमान होते हैं। राम के शिव पिनाक तोडऩे के बाद राम सीता से विवाह की रस्म पूरी होती है। अयोध्या आगमन के बाद राम को राजपाट सौंपने की राजा दशरथ की घोषणा ने मंथरा की सलाह पर रानी कैकयी को वरदान मांगने के लिए विवश किया। इस दौरान पुत्र वियोग में राजा दशरथ का शोकाकुल होना और राम, लक्ष्मण, सीता के वन गमन के दृश्यों के भाव देखते बन रहे थे।
राम और रावण के युद्ध को भी रूसी कलाकारों ने प्रस्तुत कर तालियां बटोरीं। एफगेनी ने राम की भूमिका निभाई तो वोल्गा ने सीता की। आरगेनी राजा जनक बने थे। एंजलीना सुमित्रा, विक्टर हनुमान, एलेग्जे लक्ष्मण, एलेंजेंद्रा कैकेयी, लाडोलेट ने रावण की भूमिका निभाई। कौशिल्या की भूमिका नादेज्दा सिंह ने की। 20 मिनट की इस संगीतमय रामलीला का निर्देशन रामेश्वर सिंह ने किया।
कुंभ के सेल्फी प्वाइंट पर रावण संग राम-सीता-लक्ष्मण
रूसी कलाकारों ने रविवार की शाम सिविल लाइंस स्थित यात्रिक लॉन में कुंभ के अनुभवों को साझा किया। यहां कुंभ के सेल्फी प्वाइंट पर सीता की पात्र वोल्गा और राम की भूमिका निभाने वाले अफगेनी और रावण के रूप में लाडोलेट एक साथ विभिन्न मुद्राओं में अपनी तस्वीरें कैमरे में कैद करवा रहे थे। वोल्गा ने बताया कि ऐसा आध्यात्मिक मेला उन्होंने पहले कभी नहीं देखा था।