दंड-कमंडल, त्रिशूल, माला और भस्मी के आध्यात्मिक रंग की दीवानगी सात समंदर पार के लोगों में बढ़ रही है। रूस और यूक्रेन की कई महिलाओं ने कुंभ में संन्यास धारण किया था। अब हंगरी की राजधानी बुडापेस्ट से आईं महिला चिकित्सक के दिल में सनातनी संस्कृति के प्रति इस कदर प्रेम पैदा हुआ कि वह संन्यासिनी बन गई। हंगरी की चिकित्सक ने संन्यास ग्रहण करने के बाद बुडापेस्ट में आश्रम बनाकर शिव मंदिर की स्थापना करने और वहां वेद विद्यालय खोलने का संकल्प लिया।
हंगरी के बुडापेस्ट शहर की डॉ. अनिको पड़ोसी देश नेपाल में रहने वाली जूना अखाड़े की महामंडलेश्वर साध्वी हेमानंद गिरि के संपर्क में आने के बाद सनातनी संस्कृति के करीब आईं। महामंडलेश्वर हेमानंद की शिष्या बन कर वह पिछले कुछ महीने से वेद और आयुर्वेद का प्रचार कर रही थीं। कुंभ में आईं अनिको ने न सिर्फ हिंदू धर्म स्वीकार किया, बल्कि उन्होंने कर्मकांड के साथ संन्यास ग्रहण कर लिया।
जूना अखाड़े की माई बाड़ा की अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष आराधना गिरि व महामंडलेश्वर हेमानंद की मौजूदगी में सौ से अधिक महिला साध्वियों की मौजूदगी में डॉ. अनिको को संन्यास दिलाया गया। इसी के साथ उनका नया नाम साध्वी सरस्वती गिरि रख दिया गया। डॉक्टर ऑफ मेडिसिन की डिग्री हासिल करने के बाद अनिको बुडापेस्ट में अस्पताल चला रही थीं। अमर उजाला से बातचीत में अनिको उर्फ साध्वी सरस्वती ने बताया कि वह बुडापेस्ट में जल्द ही भव्य शिव मंदिर का निर्माण कराएंगी। इसके अलावा वहां वेद विद्यालय भी खोला जाएगा, ताकि हंगरी में वे विद्या का प्रचार किया जा सके।
उन्होंने बताया कि उनकी नजर में सनातनी संस्कृति -संस्कार दुनिया में सबसे बेजोड़ हैं। इसी वजह से उन्होंने संन्यास ले लिया, लेकिन वह चिकित्सकीय पेशा नहीं छोड़ेंगी। उन्होंने बताया कि संन्यासिनी के रूप में ही वह निरंतर दुखियों, मरीजों की सेवा करती रहेंगी। इससे पहले रूस की लीलिया, यूक्रेन की अविरंजिनी ने भी कुंभ में संन्यास धारण कर लिया था।