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अजब-गजब बाबाओं के बीच छाए हैं डिजिटल बाबा, दंड कमंडल-त्रिशूल की जगह मैकबुक, ट्राईपॉड और सेल्फी स्टिक

Fri, 18 Jan 2019 10:56 PM IST
देव कश्यप अनूप ओझा, अमर उजाला, प्रयागराज
अनूप ओझा, अमर उजाला, प्रयागराज Published by: देव कश्यप Updated Fri, 18 Jan 2019 10:56 PM IST
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Kumbh 2019- Digital Baba in mela, Kandal-Trishul is replaced by Mac Book, Tripod and selfie stick
Digital Baba

संगम तट पर कुंभ में डिजिटल बाबा के दर्शन कीजिए। संगम की रेती पर सनातनी संस्कृति की अलख जगा रहे इन डिजिटल बाबा के हाथों में दंड-कमंडल, खप्पर, त्रिशूल या तलवार की जगह मैकबुक, ट्राईपॉड, सेल्फी स्टिक, महंगे आईफोन, लेप्पल माइक आ गया है। 

Kumbh 2019- Digital Baba in mela, Kandal-Trishul is replaced by Mac Book, Tripod and selfie stick
Digital Baba

संगम की रेती पर बने धूनों, शिविरों में कथा, सत्संग, भजन, ध्यान, जप, तप, योग करने वाले बाबाओं से अलग इन डिजिटल बाबाओं ने भारतीय अध्यात्म और सांस्कृतिक परंपरा को संचार तकनीक को आधार बनाया है।

Kumbh 2019- Digital Baba in mela, Kandal-Trishul is replaced by Mac Book, Tripod and selfie stick
Digital Baba

डिजिटल बाबा ट्विटल हैंडल, तरह-तरह के एप्लीकेशन, यू -ट्यूब, फेसबुक के जरिए कुंभ को ग्लोबल बना रहे हैं। इन डिजिटल बाबाओं की कोशिश से जहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के डिजिटल इंडिया का सपना साकार हो रहा है, वहीं दिव्य कुंभ की मनोरम छटा से यूरोप, एशिया व आसियान देशों के लोग लाइव जुड़कर परिचित हो रहे हैं। 

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Kumbh 2019- Digital Baba in mela, Kandal-Trishul is replaced by Mac Book, Tripod and selfie stick
Digital Baba
रामानंदाचार्य की वैष्णव परंपरा के युवा संन्यासी राम शंकर दास ने अपनी पहचान डिजिटल बाबा के रूप में बना ली है। कुंभ में डिजिटल बाबा से लाइव जुड़ने और उनसे मिलने के लिए भीड़ लग जा रही है।
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वह संगम नोज से लेकर, मूल अक्षयवट, बड़े हनुमान मंदिर के अलावा सेक्टर-16में अखाड़ों से शिविरों में नागाओं के धूने तक को सुबह से शाम तक लाइव कर रहे हैं। देवरिया के खजुरी भट्ट गांव निवासी रामशंकर बी.कॉम तक पढ़ाई करने के बाद 20वर्ष की आयु में घर का परित्याग कर आध्यात्मिक स्थलों की खोज और साधना के लिए संन्यासी बन गए।

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