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कुंभ 2019: हिन्दू परिवार में जन्मी, इस्लाम अपनाकर किया हज, अब इस अखाड़े में हैं महामंडलेश्वर

Sat, 02 Feb 2019 06:16 PM IST
देव कश्यप न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज Published by: देव कश्यप Updated Sat, 02 Feb 2019 06:16 PM IST
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kumbh mela 2019 Hindu family adopted Islam and now in Mahamandaleshwar kinnar akhada

तीर्थराज प्रयाग में चल रहा कुंभ मेला बाहर से जितना विहंगम है, अन्दर से उतना ही खूबसूरत। कुंभ में तमाम साधु-सन्त लोगों को अध्यात्म का पाठ पढ़ाकर उनकी जिंदगी रोशन कर रहे हैं। उन्हें तमाम आशंकाओं से बाहर निकालकर एक बेहतर जिंदगी जीने को प्रेरित कर रहे हैं। इस बार कुंभ मेले में जूना अखाड़े के साथ किन्नर अखाड़ा भी शामिल हुआ है। सेक्टर 14 में स्थित इस अखाड़े में रोज हजारों की भीड़ उमड़ रही है।


 

 
 
 
kumbh mela 2019 Hindu family adopted Islam and now in Mahamandaleshwar kinnar akhada

आशीर्वाद की चाह में पहुंचे लोगों को वहां से निराश होकर नही लौटना पड़ता है। अखाड़े की महामंडलेश्वर लक्ष्मी नरायण त्रिपाठी बड़ी सहजता से लोगों से मिलती हैं। इसी अखाड़े में दूसरी प्रमुख हैं चिरपी भवानी। 1992 में जन्मी चिरपी के परिजनों को 2005 में पता चला कि चिरपी ट्रांसजेंडर यानि किन्नर है तो परिवार के लोगों को बेइज्जती महसूस होने लगी। भवानी को स्कूल से भी निकाल दिया गया। इससे व्यथित होकर चिरपी भवानी ने 1 साल बाद यानि 14 वर्ष की उम्र में घर-परिवार छोड़ दिया।

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समाज के ताने से परेशान चिरपी ने 2007 में अपना धर्म त्यागकर इस्लाम अपना लिया और अपना नाम शबनम नाम रख लिया। इस्लाम अपनाने के बाद वह किन्नर समाज का हिस्सा बन गई। इसके बाद वह दिल्ली में लोगों के घर जाकर नाच-गाना करने लगी। जो पैसा मिलता उसी में गुजारा करती। इस्लाम अपनाने के बाद उन्होंने उसी धर्म का पालन किया। नमाज पढ़ा, रोजा रखा और 2012 में हज भी किया।

 
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चिरपी भवानी से शबनम और फिर चिरपी भवानी बनने की बात पर वह कहती हैं कि, 'समाज ने उस रूप में स्वीकारा नहीं इसलिए खुद को बदल लिया अब जब वही समाज स्वीकारने को तैयार है तो वापस आ जाने में हर्ज क्या है।' 2015 में उज्जैन कुंभ के 1 साल पहले भवानी ने किन्नर अखाड़ा बनाने की सोची। अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद ने एक झटके में इसे 14वें अखाड़े के रूप में मान्यता देने से मना कर दिया। 2017 आते-आते किन्नर अखाड़े को पहचान मिली (मान्यता नहीं)। और फिर चिरपी भवानी उत्तर भारत की महामंडलेश्वर बनीं। 

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Bhawani ma

प्रयाग के कुंभ 2019 में किन्नर अखाड़े ने जोरदार पेशवाई निकाली जिससे तमाम अखाड़ों में हलचल बढ़ गयी। 14वें अखाड़े के रूप में मान्यता देने के सुर तेज हुए पर नतीजा सिफर रहा। इस समय किन्नर अखाड़ा, जूना अखाड़े का एक हिस्सा है जो प्रत्येक शाही स्नान पर जूना अखाड़े के साथ संगम में स्नान करता है। चिरपी भवानी अब भवानी मां के रूप में हैं। वह एकमात्र ऐसी महामंडलेश्वर हैं जिन्होंने हज यात्रा किया है। धार्मिक समागम के रूप में स्थापित इस कुंभ की विविधता का एक रंग यह भी है। 

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