जवाहर हत्याकांड में दोषी करार दिए गए करवरिया बंधुओं की सजा सुनाए जाने के दौरान सोमवार को कचहरी सुबह से ही छावनी में तब्दील रही। सभी गेटों पर पीएसी का पहरा रहा और वादकारियों को भी गहन चेकिंग के बाद ही भीतर जाने दिया गया। उधर, दंगा नियंत्रण उपकरणों व टियर गन लेकर जवान भी दिन भर मुस्तैद रहे। सोमवार सुबह से ही कचहरी व उसके आसपास भारी फोर्स तैनात कर दी गई थी। कर्नलगंज के साथ ही अतरसुइया, मुट्ठीगंज, जार्जटाउन, खुल्दाबाद, दारागंज समेत यमुनापार व गंगापार के भी कई थानों की फोर्स को यहां लगाया गया था। इसके अलावा पीएसी व आरआरएफ के जवानों को भी तैनात किया गया। कचहरी परिसर के सभी प्रवेश द्वारों पर पीएसी का पहरा लगाया गया था। साथ ही यहां वादकारियों को भी गहन चेकिंग के बाद ही भीतर जाने दिया गया। उधर, समर्थकों का जमावड़ा सुबह से ही होने लगा था।
जवाहर पंडित हत्याकांडः छावनी में तब्दील रही कचहरी, भाजपाइयों ने बनाई दूरी
दोपहर एक बजे के बाद यह सिलसिला तेजी से बढ़ने लगा। इस दौरान समर्थकों की कचहरी परिसर के भीतर जाने को लेकर गेट पर तैनात पुलिसकर्मियों से नोकझोंक भी हुईं। हालांकि, अफसरों के सख्त रुख के चलते समर्थकों को निराश ही होना पड़ा। इसमें भाजपा के कई नेता भी शामिल रहे। समर्थकोें की भीड़ बढ़ती देख करीब एक बजे पुलिस अफसरों ने कचहरी के नए भवन के मुख्य गेट पर रस्सा बंधवाकर बैरिकेडिंग करा दी। उधर, भीतर जाने को लेकर समर्थक व पुलिसकर्मियों के बीच नोकझोंक चलती रही। जिसके बाद एसपी सिटी बृजेश कुमार श्रीवास्तव व सीओ बैरहना रत्नेश सिंह ने खुद गेट पर पहुंचकर मोर्चा संभाला और फिर समर्थकों को गेट से दूर किया। वहीं, किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए जवान बॉडी प्रोटेक्टर, हेलमेट लेकर मुस्तैद रहे। साथ ही टियर गन लेकर भी पुलिसकर्मी घूमते रहे।
दो सेक्टर में बांटकर किए गए थे सुरक्षा इंतजाम
पुलिस अफसरों ने बताया कि कचहरी व उसके आसपास के इलाके को दो सेक्टरों में बांटकर सुरक्षा व्यवस्था की गई थी। इनमें से एक आउटर तो दूसरा इनर सेक्टर था। आउटर सेक्टर में जहां खुल्दाबाद, लालापुर, शिवकुटी, दारागंज, अतरसुइया उतरांव आदि थाने की फोर्स लगाई गई थी। वहीं, इनर सेक्टर में होलागढ़, थरवई, कर्नलगंज, जार्जटाउन, कोतवाली, शाहगंज आदि थाने की फोर्स तैनात रही। उधर, सीओ बैरहना जहां कचहरी गेट पर रहकर सुरक्षा व्यवस्था के लिए आउटर सेक्टर में तैनात फोर्स का नेतृत्व करते रहे वहीं, सीओ कर्नलगंज सत्येंद्र प्रसाद तिवारी एडीजे 5 कोर्ट के आसपास तैनात रहे और इनर सेक्टर की सुरक्षा की कमान संभाले रहे।
कचहरी रोड पर नहीं आने दिए गए बड़े वाहन
उधर सुबह से ही कचहरी रोड पर ट्रैफिक डायवर्जन व्यवस्था लागू कर दी गई थी। इसके लिए जगह-जगह बैरिकेडिंग कर बड़े वाहनों का प्रवेश रोक दिया गया था। आनंद अस्पताल, पुलिस क्लब, लक्ष्मी टॉकीज, जगराम चौराहा आदि स्थानों पर बैरिकेडिंग की गई थी। जहां से सिर्फ दोपहिया वाहन सवारों को ही कचहरी की ओर जाने दिया गया। इसके साथ ही डीएम कार्यालय समेत कचहरी रोड पर जगह-जगह फोर्स तैनात की गई थी। आनंद अस्पताल से चारपहिया वाहनों को स्टैनली रोड मम्फोर्डगंज होते हुए लक्ष्मी चौराहे की ओर भेजा गया। उधर अन्य जगहों पर भी ट्रैफिक को वैकल्पिक रास्तों से होकर गुजारा गया।
मंत्री पर हमले का आरोपी भी दिखा कोर्ट परिसर में
एक खास बात यह रही कि सजा के एलान के दौरान मंत्री नंद गोपाल गुप्त पर हमले का आरोपी दिलीप मिश्र भी कचहरी परिसर में घूमता मिला। पहले वह व उसके समर्थक कटरा चौकी के सामने स्थित कचहरी नए भवन के मुख्य गेट के पास जमा रहे। हालांकि, जैसे ही करवरिया बंधुओं को नैनी जेल से कोर्ट के भीतर लाया गया, वह अपने साथियों संग कचहरी परिसर के भीतर पहुंच गया। कोर्ट में उसकी मौजूदगी चर्चा का विषय बनी रही।