प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्राथमिकता वाली स्वास्थ्य सेवा में शुमार सुपर स्पेशियलिटी सेंटर को उदासीनता के दीमक खा रहे हैं। करोड़ों की लागत वाले पांच मंजिला इस सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल में शनिवार को हर कदम पर खामियां मिलीं। अमर उजाला की पड़ताल में दोपहर 12:30 बजे तक कैंसर की ओपीडी में चिकित्सक नदारद रहे। घंटों राह डॉक्टर की राह देखते मरीजों-तीमारदारों को नींद आ गई थी, तो ओपीडी के बाहर पर्चा जमा करने वाले सोते मिले। लिफ्ट खराब होने से मरीजों को वार्डों में पहुंचाने में जहां लोगों का पसीना छूटता रहा, वहीं पोर्टिको में मोटरसाइकिलों की मनमानी पार्किंग से स्ट्रेचर और व्हील चेयर फंसी नजर आई।
अस्पताल लाइव : डॉक्टर की राह देखते मरीजों- तीमारदारों को आई नींद, ओपीडी के बाहर नंबर लगाने वाला भी सोया
220 शैया वाले पांच मंजिला इस सुपर स्पेशियलिटी सेंटर के वार्डों में पहुंचने के लिए मरीजों और तीमारदारों के लिए इन दिनों सीढ़ियां ही सहारा हैं। स्ट्रेचर पर मरीज को लेकर हांफते हुए तीमार भी जगह-जगह मिले।
इस चिकित्सक की ओपीडी के बाहर मरीजों का पर्चा जमा करने और नंबर लगाने वाला भी सोता रहा। उसके पास सुबह से कैंसर पीड़ित 12 मरीजों के पर्चे जमा थे। पूछने पर उसने बताया कि डॉक्टर राउंड पर गए हैं। जबकि, चिकित्सक के राउंड पर जाने का समय ओपीडी शुरु होने से पहले का होता है। इसी तरह इलाहाबाद विश्वविद्यालय के भूगोल विभाग में पीजी के छात्र आशीष रंजन भी ओपीडी के बाहर सोते मिले।
कैमरा क्लिक होने पर जब उनकी नींद खुली तब उन्होंने बताया कि सुबह से ही वह अपनी बारी का इंतजार कर रहे हैं। लेकिन, अभी तक उनका नंबर ही नहीं आया। यूरोलॉजी विभाग में उन्हें दिखाना था। इसी तरह जौनपुर के पंवरा गांव से गुर्दे की बीमारी से पीड़ित अपने पिता गौतम(70) को दिखाने के लिए सुबह अस्पताल आए विशाल का खड़े-खड़े पांव दुखने लगा तो वह फर्श पर ही बैठ गए।
दोपहर एक बजे तक इनकी भी नंबर नहीं आ सका था। इनके अलावा न्यूरोलॉजी विभाग में दिखाने के लिए आए झूंसी के विवेक पटेल भी घंटों परेशान रहे। करंट लगने के बाद उपचार के लिए पति शिव कुमार को लेकर धूमनगंज की सरिता भी भटकती रहीं। ऐसे एक नहीं दर्जनों मरीज सुपर स्पेशियलिटी सेंटर में मरीज और तीमारदार अपनी बारी के इंतजार में जगह-जगह फर्श पर बैठे या फिर कुर्सियों पर खर्राटे भरते नजर आए।
सुपर स्पेशिएलिटी सेंटर में लगी सभी छह लिफ्ट खराब,वार्डों में पहुंचने के लिए सीढ़ियां ही सहारा
220 शैया वाले पांच मंजिला इस सुपर स्पेशियलिटी सेंटर के वार्डों में पहुंचने के लिए मरीजों और तीमारदारों के लिए इन दिनों सीढ़ियां ही सहारा हैं। स्ट्रेचर पर मरीज को लेकर हांफते हुए तीमार भी जगह-जगह मिले। पचा चला कि इस सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल के वार्डों में जाने के लिए लगी छह में से पांच लिफ्ट पहले से ही खराब थी। एक लिफ्ट जो चल रही थी, वह भी पिछले 10 दिनों से बंद पड़ी है। ऐसे में इस सेंटर के रखरखाव में बरती जा रही उदासीनता और लापरवाही का अंदाजा लगाया जा सकता है।
अस्पताल का पोर्टिको वाहन स्टैंड में तब्दील, मरीजों के स्ट्रेचर- व्हील चेयर निकलने में भी दिक्कतें
सुपर स्पेशियलिटी सेंटर के पोर्टिको को अस्पताल कर्मियों से लेकर मरीजों-तीमारदारों ने वाहन स्टैंड में तब्दील कर दिया है। इस दिन दोपहर 12 बजे का आलम यह था कि अस्पताल के पोर्टिको के दोनों तरफ मोटरसाइकिलें खड़ी किए जाने से मरीजों की व्हील चेयर गुजरने तक का रास्ता नहीं बचा था। प्रतापगढ़ से अपने 70 वर्षीय अब्बू जान शकील अहमद का उपचार कराने आए मोहम्मद आशिफ और उनके परिजन तब हैरान रह गए, जब मरीज का स्ट्रेचर पोर्टिको के जाम में फंस गया।
इसी तरह कई मरीजों की व्हील चेयर वहां खड़ी बेतरतीब बाइकों की वजह से किसी तरह बचाकर बाहर निकाली जाती रही। मनमाना तरीकेसे बाइक खड़ी किए जाने से वहां पोर्टिको में इस तरह अतिक्रमण कर लिया गया है कि स्ट्रेचर और व्हील चेेयर पर लाए जाने वाले मरीज को सकुशल अस्पताल में पहुंचाना भी किसी चुनौती से कम नहीं लगता।