फाल्गुनी पूर्णिमा की शाम सोमवार को परम पुण्यदायिनी योग में होलिका दहन होगा। गोधूलि बेला में होलिका दहन सुख-समृद्धि और विघ्न-बाधाओं से मुक्ति देने वाला होगा। 10 मार्च को धूरंडी के साथ ही होली के रंगों की बौछार होगी। इससे पहले पूरे शहर पर रंगों की मस्ती छा गई है।
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गोधूलि बेला में आज होलिका दहन, प्रयागराज रंगों में सराबोर, जानें क्या है होलिका दहन का मुहुर्त
Mon, 09 Mar 2020 12:35 AM IST
विनोद सिंह
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Mon, 09 Mar 2020 12:35 AM IST
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चौक में सजी रंग गुलाल की दुकानें।
- फोटो : pratapgarh
होली 2020
- फोटो : Amar Ujala
ऐसे में प्रदोषकाल में सूर्यास्त से 24 मिनट पहले परम पुण्यदायिनी फाल्गुनी पूर्णिमा में होलिका दहन करना शुभ रहेगा। होलिका दहन भद्राकाल खत्म होने के बाद से ही किया जा सकता है। पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र में होलिका दहन होगा। ऐसे में सुख, समृद्धि और शांति के योग बनेंगे। दूसरे दिन यानी 10 मार्च को होली खेली जाएगी।
होली 2020
- फोटो : अमर उजाला
फाल्गुन शुक्ल पूर्णिमा को फाल्गुनिका के नाम से जाना जाता है । इस पर्व पर बुराई की प्रतीक होलिका के दहन के बाद दिन रंगों से खुशियों की बौछार होगी। सोमवार को सूर्योदय 6:08 बजे होगा।
पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र पूरे दिन और रात 1:39 बजे तक रहेगा। धृति योग भोर में 4:53 बजे तक है। इसके साथ ही ध्वज नामक महाऔदायिक योग भी मिलेगा। ज्योतिषाचार्य गिरिजाशंकर शास्त्री के मुताबिक पूर्णिमा तिथि के पूर्वार्द्ध में भद्रा है। भद्रा दोपहर 1:13 बजे तक समाप्त हो जाएगा। ऐसे में होलिका दहन सूर्यास्त 5:52 बजे से पूर्णिमा तिथि के अंत तक किया जा सकेगा।
मुहूर्त
होलिका दहन
-सूर्यास्त 5:52 बजे से पूर्णिमा तिथि के अंत तक किया जा सकेगा।
भद्राकाल दोपहर 1:13 बजे तक
पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र पूरे दिन और रात 1:39 बजे तक रहेगा। धृति योग भोर में 4:53 बजे तक है। इसके साथ ही ध्वज नामक महाऔदायिक योग भी मिलेगा। ज्योतिषाचार्य गिरिजाशंकर शास्त्री के मुताबिक पूर्णिमा तिथि के पूर्वार्द्ध में भद्रा है। भद्रा दोपहर 1:13 बजे तक समाप्त हो जाएगा। ऐसे में होलिका दहन सूर्यास्त 5:52 बजे से पूर्णिमा तिथि के अंत तक किया जा सकेगा।
मुहूर्त
होलिका दहन
-सूर्यास्त 5:52 बजे से पूर्णिमा तिथि के अंत तक किया जा सकेगा।
भद्राकाल दोपहर 1:13 बजे तक