लॉक डाउन में फंसे इलाहाबाद विश्वविद्यालय (इविवि) के छात्रों के राहत वाली खबर है। संकट की इस घड़ी में छात्रों को मानसिक रूप से स्वस्थ रचने के लिए इविवि प्रशासन ने हेल्पलाइन का गठन किया है। इसमें डीएसडब्ल्यू, मनोविज्ञान विभागाध्यक्ष, रजिस्ट्रार, चीफ प्रॉक्टर समेत कुल 12 लोगों को शामिल किया गया है, जो छात्रों को मानसिक रूप से स्वस्थ रहने में मदद करेंगे और समय-समय पर उन्हें जरूरी सलाह भी देते रहेंगे। इस बाबत इविवि के रजिस्ट्रार प्रो. एनके शुक्ला की ओर से आवश्यक दिशा-निर्देश जारी कर दिए गए हैं।
विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) की ओर से पांच अप्रैल को जारी दिशा-निर्देशों के अनुरूप हेल्पलाइन का गठन किया गया है। इसके इंचार्ज डीएसडब्ल्यू प्रो. केपी सिंह होंगे। वहीं, चीफ प्रॉक्टर प्रो. आरके उपाध्याय, सीएमपी यूनिवर्सिटी हेल्थ सेंटर डॉ. एसके अग्रवाल, मेडिकल अफसर यूनिवर्सिटी हेल्थ सेंटर डॉ. साधना पांडेय, मनोविज्ञान की विभागाध्यक्ष प्रो. नीना कोहली, मनोविज्ञान विभाग के प्रो. कोमिला थापा, सेंटर ऑफ बिहेविअरल एंड कॉग्नेटिव साइंसेज (सीबीसीएस) की विभागाध्यक्ष प्रो. भूमिका कर, महिला छात्रावास की सीनियर वार्डन प्रो. शबनम हमीद, शारीरिक शिक्षा की विभागाध्यक्ष प्रो. अर्चना चहल, ताराचंद हॉस्टल के अधीक्षक डॉ. राजीव गिरि, रजिस्ट्रार प्रो. एनके शुक्ला एवं डीएसडब्ल्यू ऑफिस के सेक्रेटेरियल असिस्टेंट सुधीर पांडेय हेल्पलाइन के सदस्य बनाए गए हैं।
हेल्पलाइन का विवरण इविवि की वेबसाइट पर भी अपलोड कर दिया गया है, जिसमें हेल्पलाइन के इंचार्ज एवं सदस्यों के फोन नंबर दिए गए हैं। इसके अलावा कुछ वेबसाइट के नाम भी दिए गए है, जिनके माध्यम से छात्र तनावमुक्त हो सकते हैं। रजिस्ट्रार की ओर से जारी दिशा-निर्देशों मेे कहा गया है कि हेल्पलाइन के सदस्य हॉस्टल में रहने वाले छात्राओं और विश्वविद्यालय आने वाले छात्रों को विभिन्न सामाजिक एवं मनोवैज्ञानिक मुद्दों पर सलाह देंगे।
साथ ही उन्हें मानसिक रूप से स्वस्थ रहने में मदद करेंगे। लॉक डाउन में फंसा कोई छात्र अपनी पढ़ाई, स्वास्थ्य एवं उससे संबंधित अन्य मुद्दों को लेकर तनाव की स्थिति में है तो हेल्पलाइन की ओर से उसकी मदद की जाएगी। मदद के लिए छात्रों को विश्वविद्यालय आने की जरूरत नहीं है। वे हेल्पलाइन के इंचार्ज या सदस्यों से सीधे फोन पर संपर्क कर सकते हैं। हेल्पलाइन के सदस्य फोन के अलावा फेसबुक एवं सोशल मीडिया के अन्य माध्यमों के जरिये भी छात्रों से निरंतर संपर्क में रहेंगे और जरूरत के अनुरूप छात्रों को मदद मुहैया कराएंगे।