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कलाकृतियों के बाजार से चमका कुंभ, हस्तशिल्पी सामन बने आकर्षण का केन्द्र 

Thu, 17 Jan 2019 08:38 PM IST
shubham न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज Published by: shubham Updated Thu, 17 Jan 2019 08:38 PM IST
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handicrafts attraction in Exhibition at kumbh mela 2019 prayagraj

हाथ में हुनर काम करने की कारीगरी इंशान को कहा नहीं पहुंचा सकता है। कुछ ऐसा ही कलाकृतियां प्रयाग के कुंभ को सुशोभित करने के साथ कुंभ में आए लोगों को बरबस रोमांचित कर रही हैं। सेक्टर एक में एक जनपद एक उत्पाद लगे हस्तशिल्प और काष्ठ शिल्प की प्रदर्शनी इसका साक्षी बना। जहां पर कारीगरों के हांथों के बने केले की रेशे से चटाई, प्लेट, जूते, पीतल के बने आकर्षक गणेश की मूर्ति और मिट्टी के बने बर्तन बेहद मनोहारी दिखीं। जिसकी खरीददारी बड़े रुचि के साथ की। 



एक जनपद और एक उत्पाद के तहत उपेक्षित हस्तशिल्प में माहिर कारीगरों के उत्थान के लिए राष्ट्रीय और अंर्तराष्ट्रीय स्तर इन्हें भागीरथ प्रयास किया गया। इसके लिए जहां उनकी आर्थिक खस्तेहाली को दूर कर धन प्रदान करना है तो वहीं बिना प्रचार प्रसार के दम तोड़ती हस्तकला को जीवंत बनाने के लिए कुंभ मेला को साधने का काम किया। इसी मंशा से जिला उद्योग केन्द्र ने मेला के सेक्टर एक के करीब 4600 वर्ग मीटर भूमि पर हस्त शिल्प उत्पाद प्रदर्शनी लगाई। जिसकी शुरुआत बीते बुधवार को हुई।

यहां हस्त शिल्प कारीगरों की सौ दुकानें लगाई गई हैं। जिसमें अमेठी की मंूज पात की कुर्सियां, अम्बेडकर नगर की वस्त्र उत्पाद, अलीगढ़ की ताले व हार्डवेयर के सामान, आजमगढ़ की मिट्टी के बने बर्तनों की कलाकृतियां, कुशीनगर और कौशाम्बी से केले से बने उत्पादों जैसे चटाइयां, तौलियां की आकर्षक दुकाने सजी रहीं। जिसे देखने और खरीदने के लिए संगम स्नान करने वाले श्रद्धालु आते हैं। इसे बड़े ही रोचकता के साथ खरीदते हैं। उद्यान विभाग के संयुक्त आयुक्त उद्योग सुंधाशु तिवारी ने बताया कि प्रदेश के उपेक्षित हस्तशिल्पियों के उत्पादों को मंच पर लाने की पहल है। ताकि इनके उत्पादों का प्रचार प्रसार हो सके और इनमें स्किल डेवलपमेंट हो, एक अच्छा बाजार मिले। ताकि इनकी वित्तीय स्थिति मजबूत हो। 

handicrafts attraction in Exhibition at kumbh mela 2019 prayagraj

आजमगढ़  के रहने वाले शिल्पकार रामनवमी प्रजापति ने कहा कि मिट्टी के बर्तनों आकर्षक तरीके से बनाने का काम का करीब दस वर्ष से प्रारंभ किया। यह काम हमारे परिवार के सभी सदस्य करते हैं। इसके लिए हमें राज्य पुरस्कार से नवाजा जा चुका है। इनका कहना है कि एक जनपद एक उत्पाद से हमारे उत्पादों की ब्राडिंग हुई। जिसका लाभ मिल रहा है। यह सरकार की देन है कि आज हमारी कलाकृतियों को बड़ा मिला और एक पहचान मिली।

कुशीनगर  के रहने वाले रवि प्रसाद ने कहा कि केले से कपड़े बनाने का कार्य दो वर्ष पहले शुरु किया। इसकी पहचान नहीं होने से आमदनी नहीं होती थी। यह व्यवसाय घाटे में जा रहा था। लेकिन प्रदेश सरकार ने कलाकृतियों को तवज्जो दी और एक मंच दिया। जिसका लाभ हमें मिल रहा है। संगम नगरी में लगे प्रदर्शनी से हमारी आमदनी का जरिया बढ़ा है। 

 कौशाम्बी के रहने वाले मंगला प्रसाद शुक्ल ने कहा कि मूल व्यवसाय केले के रेशे से बने खाने-पीने वाले बर्तनों का रहा। इसी को आगे बढ़ा रहे हैं। पर समय से सरकार और विभाग का कोई सहयोग नहीं मिला। इस कारण उत्पादों को बढ़ावा नहीं मिला। हांलाकि एक जनपद ओैर एक उत्पाद से बाजार मिलने की उम्मीद है। यह सरकार की अच्छी पहल है।
 
  

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