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CoronaVirus: भर्ती मरीज गए घर, अस्पतालों के 90 फीसदी बेड खाली

Sun, 29 Mar 2020 11:30 PM IST
विनोद सिंह न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Sun, 29 Mar 2020 11:30 PM IST
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CoronaVirus: admitted patients go home, 90 percent beds of hospitals empty
एसआरएन अस्पताल में खाली पड़े बेड। - फोटो : prayagraj

लॉकडाउन के बाद से ही नए मरीजों के भर्ती न होेने से शहर के सरकारी और निजी अस्पताल खाली हो गए हैं। जो मरीज पहले से ही भर्ती होकर उपचार करा रहे थे, अस्पताल की ओर से उनकी भी अब छुट्टी कर दी गई है।



वार्ड खाली हो चुके हैं। रही सही इमरजेंसी सेवा बहाल है लेकिन उसमें भी नए मरीजों के आने की संख्या आठ से 10 गुना कम हो गई है। निजी अस्पतालों की इमरजेंसी में ऐसे मरीजों को ही भर्ती किया जा रहा है जिनको कोरोना होने की संभावना ना के बराबर हो। ऐसे में बाहर से आने वाले मरीजों की परेशानी बढ़ गई है। कई मरीजों को लौटना पड़ रहा है। 

CoronaVirus: admitted patients go home, 90 percent beds of hospitals empty
प्रतीकात्मक फोटो

अस्पतालों के खाली होने का अनुमान इस बात से लगाया जा सकता है कि मंडल के सबसे बड़े 1000 बेड के अस्पताल एसआरएन में भर्ती मरीजों की संख्या सौ से भी कम हो गई है। जबकि यहां आठ सौ अधिक मरीजों का औसत बना रहता था। अस्पताल के एसआईसी डॉ. एके श्रीवास्तव कहते हैं कि केवल इमरजेंसी में ही मरीज भर्ती किए जा रहे हैं। अब वहां भी उनके आने की संख्या कम हो गई है।

CoronaVirus: admitted patients go home, 90 percent beds of hospitals empty
आइसोलेशन वार्ड - फोटो : pti

सामान्य दिनों में जहां 40 से 50 मरीज भर्ती होते थे। वहीं अब वहां भी चार-पांच मरीज ही भर्ती हो रहे है। इससे सर्जरी, मेडिसिन, गॉयनी, आर्थो, पल्मोनरी मेडिसिन, कार्डियो, गैस्ट्रो के वार्ड खाली हो गए हैं। उधर, कॉल्विन और बेली में दर्जन भर से भी कम मरीज हो गए हैं। कॉल्विन अस्पताल के एसआईसी डॉ. वीके सिंह कहते हैं कि उनके यहां 11 मरीज भर्ती हैं। एक-दो दिन में उनकी भी छुट्टी हो जाएगी। चिल्ड्रेन और डफरिन में भी सन्नाटा पसरा है। 

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CoronaVirus: admitted patients go home, 90 percent beds of hospitals empty
आइसोलेशन वार्ड - फोटो : अमर उजाला

शहर के साढ़े चार सौ निजी अस्पतालों, क्लीनिकों से भी मरीज गायब है। निजी तौर पर प्रैक्टिस कर रहे मोती लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज के पूर्व प्रो. एसपीएस चौहान कहते हैं कि ओपीडी तो पूरी तरह से बंद ही है। इमरजेंसी में भी केस नहीं आ रहे है। पिछले चार दिनों में केवल एक मरीज ही इमरजेंसी में भर्ती हुआ है। उनका कहना है कि लॉकडाउन की वजह से दुर्घटनाएं भी कम हो गई हैं। इससे भी मरीज नहीं आ रहे।

उधर, नर्सिंग होम एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. अविनाश सक्सेना कहते हैं कि इमरजेंसी सेवा तो बहाल है लेकिन उसमें भी मरीजों का आना सामान्य अवस्था के मुकाबले आठ से दस गुना कम है। ओपीडी बंद होने से नए मरीजों को भर्ती भी नहीं किया जा रहा है। इसकी वजह से अस्पताल खाली हो गए हैं। शहर के कुछ बड़े अस्पतालों में भी सन्नाटा पसर गया है।  हालांकि एसआरएन चिकित्सालय की इमरजेंसी में ऐसे लोगों को भर्ती किया गया। 

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CoronaVirus: admitted patients go home, 90 percent beds of hospitals empty
आइसोलेशन बेड। - फोटो : amar ujala

मरीजों की मुश्किलें बढ़ी, ऑपरेशन टला, जांच रिपोर्ट मिलनी मुश्किल 

अस्पतालों में ऐसे हालात होने पर मरीजों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। उनकी सर्जरी टल गई है, जांच नहीं हो पा रही है। ग्रामीण इलाकों के लोगों की परेशानी और है। लॉकडाउन होने से उन्हें तो शहर के अस्पतालों तक पहुंचना मुश्किल हो गया है।

रविवार को स्वरूपरानी की इमरजेंसी में पहुंचने वाले जानसेनगंज के 35 साल के सुशील यादव के परिजनों ने बताया कि सुशील दिल्ली में एक निजी कंपनी में काम करता है। सोमवार को दिल्ली में ही छत से गिर गया। उसकी रीढ़ की हड्डी में परेशानी आ गई है। वे सुशील को दिल्ली से यहां उपचार कराने के लिए लाए हैं। पहले वे उसे लेकर इंडियन प्रेस चौराहा स्थित निजी हॉस्पिटल गए लेकिन वहां कोरोना के डर से भर्ती नहीं किया। इसके बाद वे उसे एसआरएन लेकर गए। वहां भर्ती कर लिया गया। 

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