कोरोना को लेकर जहां आम लोग दहशत में हैं, वहीं अपराधी भी इससे डरे हुए हैं। कम से कम मौजूदा हालात देखकर तो ऐसा ही लग रहा है। दरअसल लॉकडाउन के बाद से बीते आठ दिनों में शहर में गंभीर अपराध के मामले न के बराबर सामने आए हैं। इसमें केवल हत्या के प्रयास का एक मामला दर्ज हुआ है। जिससे पुलिस अफसर भी राहत में हैं।
CoronaVirus: लॉकडाउन में अपराधी भी डरे, सात दिन में गंभीर अपराध का सिर्फ एक मामला
सामान्य दिनों में शहर में आए दिन आपराधिक वारदातें होती हैं। लूट, छिनैती की तो लगभग हर रोज वारदातें सामने आती हैं। लेकिन 22 मार्च को जनता कर्फ्यू लगने के बाद से स्थिति में बड़ा बदलाव हुआ। पुलिस विभाग के आंकड़े बताते हैं कि पिछले सात दिनों में शहर में गंभीर अपराध की वारदातें लगभग ना के बराबर हुईं। बात करें 22 मार्च की तो शहर के 15 थानों में कुल 13 मुकदमे दर्ज किए गए।
इसमें गंभीर मामले के तौर पर देखा जाए तो हत्या के प्रयास का एक मामला शामिल था लेकिन वह पुलिस की ओर से लिखाया गया था। जिसमें आरोप था कि दुकानें बंद कराने गई पुलिस टीम पर हमला किया गया।
23 मार्च को अलग-अलग थानों में कुल 14 केस दर्ज किए गए जिनमें गंभीर अपराध की एक भी घटना नहीं थी। इसी तरह 24 मार्च को शहर के सभी थानों को मिलाकर कुल 11 एफआईआर दर्ज की गई। हालांकि इनमें से एक भी लूट, छिनैती, हत्या का प्रयास, हत्या से संबंधित नहीं था। अगले दिन यानी 25 मार्च को दर्ज 14 मामलों में भी गंभीर धारा से जुड़ा कोई मुकदमा शामिल नहीं था।
27 मार्च को पांच मुकदमे दर्ज किए गए, यह सभी मामले धारा 144 के उल्लंघन से जुड़े थे। इसी तरह शुक्रवार को कुल 30 मुकदमे दर्ज किए गए। इनमें से गंभीर धारा का महज एक मामला रहा। कर्नलगंज में दर्ज इस मामले में छेड़खानी की भी धाराएं लगीं। हालांकि इसमें आरोप फोन पर अश्लील बातें व गालीगलौज करने का लगाया गया है।