तीसरे चरण में पहुंचे कोरोना वायरस से बचने के लिए प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी के जनता कर्फ्यू के एलान पर रविवार को संगमनगरी में पहली बार एकजुटता मिसाल बन गई। चाहे कर्फ्यू रहा हो या फिर भारत बंद या प्रदेश बंद का किसी राजनीतिक दल व सामाजिक संगठन का एलान, लेकिन ऐसी बंदी कभी देखी नहीं गई थी। बड़े-बुजुर्गों को भी याद नहीं है कि कभी उनके बचपन या किशोरावस्था के दिनों में ऐसा सन्नाटा सड़कों पर पसरा रहा हो।
पीएम के आह्वान पर कोरोना के खिलाफ संगमनगरी हुई एकजुट
त्रिवेणी संगम संगम तट पर न स्नानार्थी पहुंचे न पंडे- पुरोहित। प्रयागवाल तीर्थपुरोहित सभा के राजेंद्र पालीवाल ने बताया कि इस आपदा की रोकथाम के लिए पीएम की अपील पर संगम क्षेत्र में किसी भी तरह का कर्मकांड व अनुष्ठान नहीं कराया गया। सिविल लाइंस स्थित हल्दीराम भुजिया वाले के पास रहने वाले 78 वर्षीय मुकुल जायसवाल बताते हैं कि चाहे जितने भी प्रभावशाली व्यक्ति, नेता या संगठन का आह्वान रहा हो, लेकिन अब तक के अपने जीवन में उन्होंने ऐसी बंदी कभी नहीं देखी थी।
यह पहला मौका है , जब पीएम नरेंद्र मोदी की एक अपी पर लोग घरों में अपनी मर्जी से कैद हो गए हैं। बेनी बांध के नीचे संगम के किनारे भूखमुक्त भारत अभियान के तहत भैया जी का दाल-भात भी लोगों को नहीं मिल सका। संगम पर गरीबों, श्रद्धालुओं और संतों को दालभात वितरण अगली सूचना तक के लिए स्थगित कर दिया गया। भूखमुक्त भारत के संकल्प के साथ नवंबर 2018 में इस अभियान की शुरुआत हुई थी।
इसी तरह जनता कर्फ्यू को सफल बनाने के लिए व्यापारि, धार्मिक संगठनों की अपीलें, उनका नेतृत्व भी काम आया। नमामि गंगे के तहत गंगा विचार मंच,सिविल लाइंस व्यापार मंडल, प्रयाग व्यापार मंडल, प्रयाग केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन, पीडब्ल्यूडी नियमित वर्कचार्ज कर्मचारी संघ, इरिगेशन मिनिस्ट्रियल एसोसिएशन के अलावा अन्य संगठनों ने एकजुटता का परिचय दिया।