एनआरसी-सीएए के मुद्दे पर पूरे देश में जहां उग्र विरोध प्रदर्शन हुए वहीं प्रयागराजवासियों ने धैर्य, संयम और भाईचारे का परिचय देते हुए अमन चैन कायम रखने की मिसाल पेश की। हालांकि, विरोध दर्ज कराने को प्रदर्शन हुए लेकिन यह हिंसक नहीं बल्कि शांतिपूर्ण रहा। पुलिस और जिला प्रशासन के न्योते पर पुलिस मुख्यालय परिसर में सोमवार को जुटे बुद्धिजीवियों ने अमन की यह मिसाल आगे भी बनाए रखने का संकल्प लिया। वहीं पुलिस और प्रशासन ने शहरियों के जज्बे के लिए उनका शुक्रिया अदा करते हुए आगे भी अमन की ज्योति जलाए रखने की अपील की।
शुक्रिया प्रयागराज! एनआरसी-सीएए के मुद्दे पर प्रशासन के न्योते पर जुटे शहर के बुद्धिजीवी
प्रशासन के आमंत्रण पर अधिवक्ता, पत्रकार, प्रोफेसर, व्यापारी समेत सभी वर्ग के प्रबुद्धजन उपस्थित हुए और गंगा-जमुना तहजीब की बात करते हुए शांति व्यवस्था कायम रखने की अपील की। इलाहाबाद विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग के प्रोफेसर मुश्ताक अली ने कहा कि प्रधानमंत्री के संबोधन के बाद भ्रम काफी हद तक दूर हुआ है। यह कवायद पहले होनी चाहिए थी। संसद में बिल रखे जाने से पहले ही स्थिति स्पष्ट होनी चाहिए थी। इसके अलावा प्रधानमंत्री और गृहमंत्री के बयान में अंतर की वजह से जो भ्रम है वह भी दूर होना चाहिए। उन्होंने आंदोलनकारियों के प्रति भी नरमी बरतने की बात कही।
बार काउंसिल ऑफ इंडिया के पूर्व अध्यक्ष वीसी मिश्र, वरिष्ठ पत्रकार रतन दीक्षित, जिला बार अधिवक्ता संघ के हरिसागर मिश्रा, इकबाल अंसारी आदि ने कहा कि शहर ने एक बार फिर गंगा-जमुना तहजीब की मिसाल पेश की। इलाहाबाद विश्वविद्यालय के अरबी-फारसी विभाग की डॉ.सालेहा राशीद ने कहा कि यहां संगम हैं। यहां सभी को मिलकर रहना ही है। इस जमीं पर हमें पैदाइश पर फक्र है। कार्यक्रम में कुछ वक्ताओं ने एनआसी-सीएए के मुद्दे पर सही-गलत को परिभाषित करने की कोशिश की। इससे तनाव बढ़ने के साथ बैठक का मकसद भटकने का खतरा था लेकिन डीएम भानु चंद्र गोस्वामी ने उन्हें बीच में ही रोक दिया।
महापौर अभिलाषा गुप्ता ने कहा कि प्रयागराज में कभी माहौल नहीं बिगड़ा। शहरियों की तरफ से भरोसा भी दिलाया कि भाई चारा का यह आलम आगे भी कायम रहेगा। डीएम के साथ एसएसपी सत्यार्थ अनिरूद्ध पंकज ने शहर में शांति व्यवस्था कायम रखने में सहयोग तथा सूझबूथ दिखाने के लिए शहरियों के प्रति आभार प्रकट किया। एडीजी सुजीत पांडेय ने भा शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए शहरियों के प्रति आभार जताया। साथ में प्रशासनिक और पुलिस की टीम की पीठ थपथपाई। उन्होंने अपील भी कि भविष्य में यदि कोई अनहोनी हो जाए तो कम से कम यहां मौजूद सभी लोग घटना स्थल पर अवश्य पहुंचेंगे।
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‘आप सभी के सहयोग के बिना शांति बनाए रखना संभव नहीं था। हमें आजाद हुए करीब 70 वर्ष हो गए हैं। हम कहां के हैं? कहां हैं? और कहां रहेंगे? अब इन सवालों के लिए कोई जगह नहीं है। इसलिए किसी को उत्तेजना बढ़ाने की जरूरत नहीं है। प्रशासन भी जाति-धर्म देखकर योजनाओं को लागू नहीं करता।’
डॉ.आशीष कुमार गोयल, मंडलायुक्त