बेखौफ बदमाशों ने गुरुवार को दिनदहाड़े जेल के प्रधान वार्डर की गोली मारकर हत्या कर दी। इस मामले में पुलिस अब इस बिंदु पर छानबीन कर रही है कि कहीं जिला जेल के पास प्रधान बंदीरक्षक हरिनारायण त्रिवेदी की हत्या कहीं जेल में बंद शातिर बंदियों ने तो नहीं कराई? ऐसा इसलिए भी माना जा रहा है क्योंकि, मनमानी रोकने पर जिला जेल के आठ नंबर बैरक में निरुद्ध बंदियों से 15 दिन पहले उनका विवाद हुआ था। हालांकि पुलिस अफसर इस बारे में अभी कुछ भी खुलकर बोलने के लिए तैयार नहीं हैं।
प्रतापगढ़: जेल वार्डर हत्याकांड में बड़ा खुलासा, इस वजह से की गई हत्या
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जिला कारागार में तैनात प्रधान बंदीरक्षक हरिनारायण त्रिवेदी सख्त मिजाज के थे। वह अपनी ड्यूटी का बखूबी निर्वहन करते थे। साथी बंदीरक्षकों को भी जेल मैनुअल का पालन कराने को लेकर अक्सर खरी-खोटी सुनाते रहते थे। उनका यह रवैया जेल में बंद कई मठाधीश बदमाशों को अखर रहा था। जेल सूत्रों की मानें तो 15 दिन पहले बैरक नंबर आठ में निरुद्ध दबंग बंदियों से हरिनारायण त्रिवेदी की तकरार हो गई थी। प्रधान बंदीरक्षक ने साफ कहा था कि किसी भी कीमत पर जेल मैनुअल के विपरीत सुविधा नहीं मिलेगी। हर दिन सभी बैरकों की गहन छानबीन कराई जाती थी। इससे कुछ दबंग बंदी प्रधान बंदीरक्षक से चिढ़े थे। हालांकि इनमें से कुछ बंदीरक्षकों को गैरजनपद की जेलों में ट्रांसफर किया गया था। अवकाश से लौटने के बाद गुरुवार की सुबह ही प्रधान बंदीरक्षक हरिनारायण त्रिवेदी ने कार्यभार संभाला। बैरक का निरीक्षण कर बंदियों से जानकारी भी ली।
फिलहाल जेल प्रशासन किसी भी विवाद से इनकार कर रहा है। जबकि पुलिसिया जांच में यह बात सामने आ रही है कि घटना के तार जेल से ही जुड़े हैं। साथी बंदीरक्षक भी मान रहे हैं कि हरिनारायण त्रिवेदी किसी धमकी से घबराते नहीं थे। वह नियम कानून के बहुत पाबंद थे। घटना के बाद कई बंदीरक्षक भी दबी जुबान से चर्चा करते रहे कि हो न हो जेल में निरुद्ध बंदियों की साजिश से ही प्रधान बंदीरक्षक की हत्या हुई है।
गोंडा हो गया था तबादला
जनपद लखनऊ के नगराम थाना क्षेत्र के निगोहा पुरहिया निवासी हरिनारायण त्रिवेदी वर्ष 2013 में लखनऊ जेल से स्थानांतरित होकर प्रतापगढ़ कारागार आए थे। प्रमोशन के बाद वह प्रधान बंदीरक्षक बने। पूरे जेल में निरुद्ध बंदियों की जिम्मेदारी उनके कंधों पर थी। सुबह से लेकर देर रात तक वह बंदियों के सोने तक जेल के कोने-कोने का जायजा लेते रहते थे। बीते अप्रैल माह में प्रशासनिक आधार पर उनका स्थानांतरण गोंडा जेल के लिए हो गया था, लेकिन विभागीय अधिकारियों ने कार्यमुक्त नहीं किया। जिसके चलते वह ड्यूटी करते रहे। गुरुवार को घटना के बाद साथी यही कहते रहे कि मौत ने ही उन्हें रोके रखा।
दोनों हाथों में असलहा लहराते व फायरिंग करते भागे हत्यारे
जिला कारागार में तैनात प्रधान बंदीरक्षक हरिनारायण त्रिवेदी की गोली मारकर हत्या करने के बाद रुमाल से चेहरा आधा छिपाकर भागने वाले बाइक सवार बदमाश असलहों से लैस थे। भागने के दौरान तिराहे पर दो फायर भी किया। बाइक पर पीछे बैठा बदमाश दोनों हाथों में असलहा लहराता रहा। ताकि कोई उसे दबोचने का प्रयास न कर सके। बदमाशों के हाथ में असलहा देख आसपास के लोग आगे बढने के बाद पीछे हट गए।
घटना के बाद बंद होने लगीं दुकानें
जेल रोड क्रासिंग के पास दिनदहाड़े बेखौफ बदमाशों ने जेल में तैनात प्रधान बंदीरक्षक की गोली मारकर हत्या कर दी। आसपास के दुकानदार अपनी दुकानें बंद करने लगे। जिस सब्जी की दुकान पर हरिनारायण त्रिवेदी खरीदारी कर रहे थे। वह ठेला लेकर भाग निकला। कुछ देर बाद शहर कोतवाली सब्जी विक्रेता को अपने साथ ले आए। सब्जी बेचने वाने तीनों किशोर थे। पुलिस सब्जी विक्रेता के अलावा आसपास के लोगों से बदमाशों के हुलिए के बारे में पूछताछ करती रही।