डायबिटीज के मरीजों के लिए एक अच्छी खबर है, अब वे भी बेखौफ होकर चावल खा सकेंगे। जिले में काले धान की खेती की कवायद शुरू हो गई है। 400 से 800 रुपये प्रति किग्रा तक बिकने वाले इस धान की खेती से किसानों के सपने तो पूरे होंगे ही, मधुमेह और रक्तचाप के मरीजों के लिए भी यह वरदान साबित होगा। इसके खाने से शुगर बढ़ने का खतरा नहीं होगा, उल्टे यह दवा का काम करता है।
agriculture news: आया काला धान- बढ़ाएगा नहीं बल्कि कम करेगा ब्लड प्रेशर और शुगर
जसरा के दुदाबा गांव के त्रिभुवन नाथ पटेल ने कुछ किसानों के सहयोग से पिछले वर्ष काले धान की खेती की थी। फायदे को देखते हुए इस वर्ष भी नर्सरी डाली गई है। इस धान की खासियत यह है कि इसकी नर्सरी तो हरी होती है लेकिन फसल तैयार होने पर उसका ज्यादातर हिस्सा काला हो जाता है। इसका चावल भी काला होता है।
त्रिभुवन का कहना है कि इसमें खाद, कीटनाशक का उपयोग नहीं होता। इस तरह से इसकी खेती में लागत तो कम आती ही है, इसके चावल में रसायनों का खतरा भी नहीं होता। त्रिभुवन ने बताया कि पिछले वर्ष 50 किसानाें ने प्रति बीघा आठ से 12 क्विंटल धान की पैदावार प्राप्त की। हाइब्रिड को छोड़ दें तो अच्छे किस्म की धान की अन्य प्रजातियों से भी 10 से 12 क्विंटल पैदावार मिलती है।
उप निदेशक कृषि विनोद कुमार का कहना है कि पैदावार और लागत को देखते हुए इसकी खेती किसानों के लिए फायदेमंद है। यह शुगर के मरीजों के लिए भी लाभदायक है। ऐसे में इस धान के चावल की मांग भी है। इसलिए काले धान की खेती के लिए किसानों को प्रोत्साहित करने की योजना बनाई गई है।
कुंभ में ही बन गई थी भूमिका
यूं तो काले धान की पैदावार मुख्यत: मणिपुर में होती है, लेकिन अब चंदौली तथा आसपास के अन्य जिलों में भी इसकी पैदावार होने लगी है। कुंभ-2019 में कृषि विभाग की प्रदर्शनी में चंदौली का भी स्टाल था। वहां काले धान के बारे में भी जानकारी दी गई थी। त्रिभुवन ने बताया कि 300 रुपये प्रति किग्रा बीज मिल रहा था। प्रदर्शनी में बताया गया था कि इसके चावल की कीमत न्यूनतम 400 रुपये प्रति किग्रा है।उनका कहना है कि इतना महंगा चावल खरीदकर तो नहीं खा सकते लेकिन पैदावार तो कर सकते हैं। इसी जज्बे से पिछले साल इसकी खेती का निर्णय लिया गया। यहां चाक आहरे प्रजाति की नर्सरी डाली गई। इसमें 50 और किसान जुड़ गए और छोटे-छोटे हिस्से में इसकी खेती शुरू की गई। इस वर्ष 50 हेक्टेयर में काले धान की खेती का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए नर्सरी डाल दी गई है।