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अलीगढ़ बवाल: पुलिस भांप न सकी हालात...खुफिया तंत्र रहा फेल; 2017 से पहले इस जगह अक्सर होते रहते थे विवाद
Thu, 20 Jun 2024 09:51 AM IST
शाहरुख खान
अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़
अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़
Published by: शाहरुख खान
Updated Thu, 20 Jun 2024 09:51 AM IST
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Tension in Aligarh
- फोटो : अमर उजाला
अलीगढ़ के पुराने शहर के रेलवे रोड और ऊपरकोट के बीच अब्दुल करीम चौराहा-सब्जी मंडी चौराहा पर बॉर्डर सरीखी स्थिति है। सांप्रदायिक दृष्टि से संवेदनशील शहर का यह इलाका इस तरह की घटनाओं का केंद्र बिंदु रहा है। मगर समय के साथ तस्वीर बदल रही है। 2017 के बाद से लगातार शहर अमन की ओर लौट रहा है। मगर मंगलवार रात के घटनाक्रम के बाद सुबह बने हालात ने फिर पुलिस के खुफिया तंत्र पर सवाल खड़े कर दिए हैं। आखिर कोई इनपुट क्यों नहीं मिल पाया। जबकि एजेंसियों के पास लंबा समय था।
Tension in Aligarh
- फोटो : अमर उजाला
वैसे अपने शहर के इतिहास पर गौर करें तो शहर सांप्रदायिक दृष्टि से प्रदेश के उन चुनिंदा शहरों में शामिल है, जो संवेदनशील हैं। मगर पिछले करीब एक दशक से स्थितियां लगातार सामान्य की ओर बढ़ रही हैं। हां, 2017 के बाद सीएए-एनआरसी के घटनाक्रम को छोड़ दें तो हालात बेहद सामान्य हैं।
Tension in Aligarh
- फोटो : अमर उजाला
सीएए-एनआरसी का घटनाक्रम भी पब्लिक का सिस्टम से टकराव था। उसमें किसी तरह का कोई दूसरा पक्ष नहीं था। 2017 के घटनाक्रम पर गौर करें तो रेलवे रोड पर रक्षाबंधन के दिन सुबह सुबह रंगदारी विवाद में समुदाय विशेष के दो युवकों की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी।
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Tension in Aligarh
- फोटो : अमर उजाला
इस घटना के ठीक बाद जुमे के दिन ऊपरकोट पर ऐसा उपद्रव हुआ कि पुराना शहर कई दिन तक तनाव में रहा। उस समय भी पुलिस के सूचनातंत्र के फेल होने की बात उजागर हुई। उससे पहले की बात करें तो अक्सर किसी भी घटना में शहर के केंद्र बिंदु सब्जी मंडी चौराहा पर ऊपर कोट का पक्ष तो अब्दुल करीम चौराहा पर रेलवे रोड का पक्ष पहुंचकर प्रदर्शन करता रहा है। मगर 2017 के बाद से आज तक ऐसा नहीं हुआ।
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Tension in Aligarh
- फोटो : अमर उजाला
इधर, रात हुए घटनाक्रम के बाद पुलिस एक पक्ष को मैनेज करने में लगी रही। वह किसी तरह की कानून व्यवस्था हाथ में न ले लें। इसी दिशा में प्रयासरत रही। मुकदमा आनन फानन लिखा। गिरफ्तारी रात में ही हुई। मगर न तो उसकी प्रतिक्रिया पर किसी का ध्यान गया और न पुलिस की खुफिया टीम या इलाका पुलिस की सक्रिय रहने वाली टीम, पुलिस प्रशासन के अधिकारी अपने चहेतों के जरिये इस दिशा में इनपुट जुटा पाए कि विरोध इतना बड़ा हो जाएगा।