अलीगढ़ में सांसद के करीबी प्रॉपर्टी डीलर व भाजयुमो के पूर्व मंडल उपाध्यक्ष सोनू चौधरी हत्याकांड में पुलिस को बड़ी सफलता हाथ लगी है। बैरामगढ़ी माइनर पुलिया पर हुई पुलिस मुठभेड़ में इस हत्याकांड के मुख्य शूटर शिवा को गिरफ्तार कर लिया, जिसके दोनों पैर में गोली लगी है। प्रारंभिक पूछताछ में सोनू के व्यापारिक पार्टनर और उसके सहयोगी अपराधी द्वारा हत्या कराया जाना स्वीकारा है।
पुलिस तलाश में जुटी हुई है। घटना 25 जुलाई की सुबह करीब 9:30 बजे की है, जब कोंडरा निवासी प्रॉपर्टी डीलर शैलेंद्र उर्फ सोनू चौधरी की हत्या की गई। हालांकि परिवार ने गांव की रंजिश में कुछ लोगों व उनके अज्ञात साथियों पर मुकदमा दर्ज कराया था, मगर पुलिस नामजदों की भूमिका पर संदेह करते हुए जांच कर रही थी।
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गोली लगने से कार के शीशे में हुए छेद
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
इसी जांच के क्रम में सीसीटीवी फुटेज व सर्विलांस की मदद से कोंडरा से सटे महुआ खेड़ा क्षेत्र के गांव तालसपुर के शिवा नाम के अपराधी व सोनू के प्रॉपर्टी पार्टनर दिनेश का नाम सामने आया। पुलिस की टीमें इन दोनों की तलाश में थीं। शूटर शिवा ने पूछताछ में काफी कुछ उजागर हुआ है।
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मौके पर जांच के लिए पहुंचे पुलिस अधिकारी
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
30 सेकंड बातचीत... फिर ताबड़तोड़ गोलियां चलाईं
मुठभेड़ में दबोचे गए शूटर ने स्वीकारा है कि वह जब हत्या करने आया तो गाड़ी में सोनू से उसने सिर्फ 30 सेकंड बातचीत की होगी। इसके बाद ताबड़तोड़ फायरिंग कर दी। हत्या के बाद वह संजू के साथ मांट होते हुए गाजियाबाद पहुंचा। इसके बाद दोनों अलग अलग हो गए। फिर उसके विषय में जानकारी नहीं।
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गोली लगने से कार के शीशे में हुए छेद
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
पकड़े गए शिवा ने बताया कि इस हत्या को अंजाम देने के लिए हेमू ने पहले संजू व इलाके के एक अन्य शूटर को लगाया था। इसके बाद हेमू खुद शिवा व तीन-चार अन्य लोगों को लेकर उज्जैन रवाना हो गया। मगर अचानक 23 जुलाई को संजू के साथ लगाए गए शूटर ने हत्या में शामिल होने से इन्कार कर दिया। इस पर हेमू ने शिवा को ग्वालियर से संजू के साथ हत्या करने के लिए वापस भेजा। वह रात में यहां पहुंचा।
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शैलेंद्र सिंह उर्फ सोनू चौधरी की फाइल फोटो
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
24 जुलाई की सुबह वह घटनास्थल पर ही सोनू से मिला। तब काफी लोग थे। उसने अपना परिचय हेमू के दोस्त के रूप में देकर महुआ खेड़ा में खुद पर मुकदमा दर्ज होने व मदद मांगकर बातचीत की। अगर सोनू अकेला होता तो उसी दिन मार दिया जाता। मगर भीड़ के चलते ये नहीं कर पाए। चूंकि संजू काफी समय से उसकी रेकी कर रहा था। आने जाने की टाइमिंग की जानकारी थी। इसलिए अगले दिन यानि 25 जुलाई को पहुंच गए।