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विश्व जनसंख्या दिवस पर पढ़िए खुशखबर, बढ़ने लगी है बेटियों की संख्या, ये हैं आंकड़े
Thu, 11 Jul 2019 01:06 PM IST
मुकेश कुमार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
Published by: मुकेश कुमार
Updated Thu, 11 Jul 2019 01:06 PM IST
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बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ का संदेश देतीं छात्राएं
- फोटो : अमर उजाला
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विश्व जनसंख्या दिवस पर ताजनगरी आगरा से खुशखबर है। आज बेटियां किसी से कम नहीं है। इस बात को अब ज्यादातर लोग मानने लगे हैं। यही कारण है कि बेटियों के जन्मदर में लगातार वृद्धि हो रही है। बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ का असर भी दिखने लगा है। वर्ष 2001 से अब तक पर नजर डालें तो बेटियों की संख्या लगातार बढ़ रही है।
वर्ष 2001 की जनगणना के मुताबिक आगरा जिले में महिला-पुरुष का औसत 866/1000 था। बेटियों के कम औसत से पारिवारिक ढांचा भी बिगड़ने लगा, तब बेटियों की महत्ता लोग समझने लगे। भ्रूण लिंग जांच पर सख्त कानून और जागरूकता के चलते बेटियों की संख्या लगातार बढ़ रही है। 2018 में महिला-पुरुष का औसत 928/1000 पहुंच गया है।
सीएमओ डॉ. मुकेश वत्स का कहना है कि परिवार और समाज के लिए बेटियां जरूरी हैं। इनकी कमी से आने वाली विकृतियां और पारिवारिक ढांचा भी बिगड़ा। अब लोग जागरूक हुए हैं और बेटियों की संख्या लगातार बढ़ रही है, जो शुभ संकेत हैं।
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वर्ष 2001 की जनगणना के मुताबिक आगरा जिले में महिला-पुरुष का औसत 866/1000 था। बेटियों के कम औसत से पारिवारिक ढांचा भी बिगड़ने लगा, तब बेटियों की महत्ता लोग समझने लगे। भ्रूण लिंग जांच पर सख्त कानून और जागरूकता के चलते बेटियों की संख्या लगातार बढ़ रही है। 2018 में महिला-पुरुष का औसत 928/1000 पहुंच गया है।
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सीएमओ डॉ. मुकेश वत्स का कहना है कि परिवार और समाज के लिए बेटियां जरूरी हैं। इनकी कमी से आने वाली विकृतियां और पारिवारिक ढांचा भी बिगड़ा। अब लोग जागरूक हुए हैं और बेटियों की संख्या लगातार बढ़ रही है, जो शुभ संकेत हैं।
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परिवार नियोजन के लिए महिलाएं ज्यादा जागरूक
छोटा परिवार, खुशियां अपार। इसको महिलाएं बखूबी समझ रही हैं। परिवार नियोजन साधन अपनाने में महिलाओं की भागेदारी पुरुषों के मुकाबले कई अधिक है। नसबंदी की बात करें तो जहां साल दर साल संख्या बढ़ रही है तो वहीं पुरुषों का औसत कम हो रहा है।
इस साल महज 52 पुरुषों ने नसबंदी कराई तो 9410 महिलाओं ने कदम बढ़ाए। परिवार नियोजन सेल प्रभारी डॉ. रचना गुप्ता बताती हैं कि परिवार नियोजन अपनाने में महिलाएं ज्यादा जागरूक हैं। जन्म दर तीन फीसदी है, जो अगले छह साल में 2.10 प्रतिशत तक लाने का लक्ष्य है।
यह मिलती है प्रोत्साहन राशि:
महिला नसबंदी: 2000 रुपये
प्रसव पश्चात नसबंदी: 3000 रुपये
पुरुष नसबंदी: 3000 रुपये
गर्भ निरोधक इंजेक्शन: 100 रुपये प्रति डोज
प्रसव के बाद दो फॉलोअप पर: 300 रुपये
इस साल महज 52 पुरुषों ने नसबंदी कराई तो 9410 महिलाओं ने कदम बढ़ाए। परिवार नियोजन सेल प्रभारी डॉ. रचना गुप्ता बताती हैं कि परिवार नियोजन अपनाने में महिलाएं ज्यादा जागरूक हैं। जन्म दर तीन फीसदी है, जो अगले छह साल में 2.10 प्रतिशत तक लाने का लक्ष्य है।
यह मिलती है प्रोत्साहन राशि:
महिला नसबंदी: 2000 रुपये
प्रसव पश्चात नसबंदी: 3000 रुपये
पुरुष नसबंदी: 3000 रुपये
गर्भ निरोधक इंजेक्शन: 100 रुपये प्रति डोज
प्रसव के बाद दो फॉलोअप पर: 300 रुपये