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सूर सरोवर पक्षी विहार में आया दुर्लभ पैंगोलिन, खतरा महसूस होने पर बदल लेता है आकार

Tue, 01 Dec 2020 12:17 AM IST
मुकेश कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा Published by: मुकेश कुमार Updated Tue, 01 Dec 2020 12:17 AM IST
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Wildlife SOS team rescues rare pangolin in agra
दुर्लभ पैंगोलिन - फोटो : Wildlife SOS

आगरा के सूर सरोवर पक्षी विहार में पर्यटकों को दुर्लभ और लुप्तप्राय प्रजाति का 'पैंगोलिन’ भी देखने को मिल सकता है। वन विभाग और वाइल्डलाइफ एसओएस की टीम ने रविवार को पक्षी विहार में दुर्लभ प्रजाति के पैंगोलिन को छोड़ा है। इसे बिचपुरी के खेत से बचाया गया है। बता दें कि दुनिया में सबसे ज्यादा तस्करी के शिकार इन पैंगोलिन पर लगातार खतरे का साया मंडरा रहा है, कभी-कभी वे सड़क दुर्घटनाओं का शिकार भी होते हैं। 

Wildlife SOS team rescues rare pangolin in agra
दुर्लभ पैंगोलिन - फोटो : Wildlife SOS/ Forest Department
वन्यजीव संरक्षण संस्था वाइल्डलाइफ एसओएस को बिचपुरी के एक व्यक्ति ने खेत में एक अजीब तरह के जानवर के होने की सूचना दी। एनजीओ की बचाव टीम मौके पर पहुंची। टीम के सदस्यों ने जानवर की पुष्टि भारतीय पैंगोलिन के रूप में की। इस दुर्लभ प्रजाति के जीव को वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 की अनुसूची-I के तहत संरक्षित और आईयूसीएन रेड लिस्ट में 'लुप्तप्राय' के रूप में सूचीबद्ध किया गया है।
Wildlife SOS team rescues rare pangolin in agra
दुर्लभ पैंगोलिन - फोटो : Wildlife SOS
पैंगोलिन घुमावदार तरीके से एक गेंद में बदल जाते हैं, जो कि उनके लिए एक रक्षा तंत्र का काम करता है। इसका उपयोग वह खतरा महसूस होने पर करते हैं। चूंकि यह छोटा सा जानवर अवैध शिकार में सबसे ज्यादा मांग में रहता है, इसी कारण वाइल्डलाइफ एसओएस टीम सावधानीपूर्वक पैंगोलिन को अपनी ट्रांजिट फैसिलिटी ले आई। कुछ दिनों की चिकित्सकीय देखभाल के बाद पैंगोलिन को जंगल में छोड़ दिया गया।
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दुर्लभ पैंगोलिन - फोटो : Wildlife SOS/ Forest Department
वाइल्डलाइफ एसओएस के सह संस्थापक और सीईओ कार्तिक सत्यनारायण ने बताया कि आगरा क्षेत्र में पैंगोलिन जैसे दुर्लभ जानवर का मिलना वन्यजीवों में विविधता का प्रतीक है। पैंगोलिन को स्वस्थ स्थिति में वापस जंगल में छोड़ दिया गया है। 
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Wildlife SOS team rescues rare pangolin in agra
पैंगोलिन - फोटो : Wildlife SOS/ Forest Department
पैंगोलिन को भारतीय कानून (वाइल्डलाइफ प्रोटेक्शन एक्ट 1972) और कन्वेंशन ऑन इंटरनेशनल ट्रेड इन एनडेनजार्ड स्पीशीज (CITES) के तहत संरक्षित किया गया है। लेकिन अवैध रूप से मांस के लिए शिकार के कारण यह प्रजाति खतरे में है। आंध्र प्रदेश, केरल, तमिलनाडु, उड़ीसा, मणिपुर, त्रिपुरा, असम, नागालैंड और पश्चिम बंगाल में पैंगोलिन के मांस और इनके स्केल्स का स्थानीय स्तर पर व्यापार भी रिपोर्ट किया गया है। 
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