छत्रपति शिवाजी महाराज के आगरा आगमन-वापसी की 351वें वर्षगांठ पर पुणे से उत्तर भारत कृतज्ञता मैत्री जागरण यात्रा शुक्रवार को आगरा पहुंची। इस उपलक्ष्य में डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय के जेपी सभागार में आयोजित संगोष्ठी में कार्यक्रम अध्यक्ष राज्यपाल राम नाईक ने अपने आगरा किला भ्रमण का जिक्र करते हुए कहा कि उन्होंने वह स्थान देखा जहां छत्रपति और औरंगजेब मिले। यहां पट्टिका पर लिखा है कि शिवाजी गर्मी के चलते बेहोश हो गए और खंभा का सहारा लिया। वीर योद्धा के बारे ये पढ़कर वह स्तब्ध हो गए।
शिवाजी जैसा योद्धा दुनिया में दूसरा कोई नहीं, उनके इतिहास पर शोध की जरूरत: राम नाईक
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कार्यक्रम को संबोधित करते राज्यपाल राम नाईक
- फोटो : अमर उजाला
राज्यपाल ने कहा कि शिवाजी जैसा योद्धा दुनिया में दूसरा कोई नहीं हुआ। ऐसे में नई पीढ़ी तक सही जानकारी जाए, इसके लिए इतिहास पर शोध जरूरी है। उन्होंने कहा कि जैसे अटल विहारी वाजपेयी ने पोखरण में परमाणु परीक्षण किया और किसी को आभास तक नहीं होने दिया, ऐसे ही शिवाजी महाराज अपनी चतुर नीति के बल पर आगरा किले से सकुशल निकल गए और औरंगजेब को भनक तक नहीं लगी।
शिवाजी जैसा योद्धा दुनिया में दूसरा कोई नहीं, उनके इतिहास पर शोध की जरूरत: राम नाईक
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उत्तर भारत कृतज्ञता मैत्री जागरण यात्रा
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मुख्य वक्ता मृत्युंजय आश्रम अमरकंटक मध्यप्रदेश के स्वामी हरिहरानंद गिरि ने कहा कि शिवाजी अवतारी पुरुष थे, उन्हीं के चलते धर्म-संस्कृति सुरक्षित रही। उनके आगरा आगमन के 351वें साल में निकाली जाने वाली ये यात्रा कृतज्ञता नहीं उत्तर भारतीयों का सौभाग्य वाली बात है। कुछ संगठनों के चलते पूर्व में उत्तर भारत और महाराष्ट्र के लोगों में मतभेद हुए, इस यात्रा से सब दूर हो जाएंगे।
शिवाजी जैसा योद्धा दुनिया में दूसरा कोई नहीं, उनके इतिहास पर शोध की जरूरत: राम नाईक
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उत्तर भारत कृतज्ञता मैत्री जागरण यात्रा
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यात्रा प्रभारी संदीप महेंद्र ने कहा कि वीर पुरुष और संतों को क्षेत्रवाद में बांटने की साजिश हो रही है। इस यात्रा से स्वामी विवेकानंद, गुरु नानक देव, शिवाजी महाराज, गुरु गोविंद सिंह किसी प्रांत मजहब नहीं पूरे राष्ट्र के गौरव हैं। कुलपति डॉ. अरविंद दीक्षित ने कहा कि औरंगजेब ने भले ही बुलाया हो लेकिन शिवाजी महराज विशेष योजना के तहत आगरा आए थे। उन्होंने आज की पीढ़ी से शिवाजी महाराज और गुरु गोविंद सिंह के जीवन से प्रेरणा लेने की बात कही।
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उत्तर भारत कृतज्ञता मैत्री जागरण यात्रा
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शिवाजी महाराज के आगरा आगमन-वापसी की 351वें वर्ष पर पुणे के राजगढ़ किले से 153 सदस्यीय दल ने 10 नवंबर को यात्रा शुरू की। ये 14 राज्यों से होकर 12 दिसंबर को पुणे में ही समाप्त होगी। ये यात्रा शिवाजी महाराज के आगरा किला से आजाद होकर महाराष्ट्र तक पहुंचने वाले क्षेत्रों से होकर गुजरेगी और लोगों का आभार जताएगी।