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'कोयले की कालिख' बिगाड़ रही ताज की सूरत, आईआईटी के अध्ययन में हुआ बड़ा खुलासा

Wed, 16 Oct 2019 11:54 AM IST
Abhishek Saxena अमित कुलश्रेष्ठ, अमर उजाला, आगरा
अमित कुलश्रेष्ठ, अमर उजाला, आगरा Published by: Abhishek Saxena Updated Wed, 16 Oct 2019 11:54 AM IST
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Tajmahal Attack of Dust and Coal Ash pollution Hindi News
tajmahal
10,400 वर्ग किमी क्षेत्र में फैले ताज ट्रिपेजियम जोन में जमकर कोयला जलाया जा रहा है। शहर में भट्टियों में और टीटीजेड के 50 किमी क्षेत्र के बाहर ईंट-भट्ठों में कोयला जलाने से निकली राख ताजमहल तक पहुंच रही है। यह चौंकाने वाला खुलासा आईआईटी कानपुर की स्टडी रिपोर्ट में हुआ है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से कराए गए अध्ययन में ताज पर प्रदूषण के  स्रोत की जांच की गई थी, जिसमें 50 किमी के दायरे में मथुरा रिफाइनरी और 100 किमी दायरे में मौजूद हरदुआगंज पावर प्लांट से ताज पर प्रदूषण तत्व पाए गए। पेश है एक रिपोर्ट...
Tajmahal Attack of Dust and Coal Ash pollution Hindi News
ताज महल
आईआईटी कानपुर के सिविल इंजीनियर विभाग के हेड प्रो. मुकेश शर्मा ने केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को जो रिपोर्ट सौंपी है, उसमें ताज पर प्रदूषण तत्वों के स्रोत को बताया गया है। पर्टिकुलेट मैटर यानी पीएम-2.5 कणों की मात्रा सबसे ज्यादा कोयला जलाने और राख से बढ़ रही है। इसके बाद वाहन और लकड़ी-बायोमास जलने से प्रदूषण पाया गया। जांच के लिए लगाए गए फिल्टर पेपरों में प्लास्टिक, पेपर और ठोस कूड़ा जलाए जाने से होने वाले प्रदूषण तत्व पाए गए।
Tajmahal Attack of Dust and Coal Ash pollution Hindi News
ताज महल
स्टडी में ताज पर सल्फर डाई ऑक्साइड, नाइट्रोजन डाई ऑक्साइड की मात्रा तो तय सीमा से कम मिली, लेकिन अमोनिया की मात्रा बेहद ज्यादा रही। विशेषज्ञों के मुताबिक  यमुना नदी में ट्रीटमेंट के बिना छोड़े गए नालों के पानी के कारण यह मात्रा बढ़ी है। हाइड्रोक्लोरिक एसिड की मात्रा भी दो गुना ज्यादा है। ताज के गुंबद पर धूल कणों की मात्रा ज्यादा है। इसे रोकने के लिए नदी में पानी छोड़कर नमी बनाए रखने की सिफारिश की गई है।
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बैठक में मौजूद अधिकारी (फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला
ताज ट्रिपेजियम जोन (टीटीजेड) अथॉरिटी की बैठक में कमिश्नर अनिल कुमार केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से कराई गई आईआईटी कानपुर की स्टडी रिपोर्ट पर चर्चा करेंगे। रिपोर्ट में जिस तरह से कोयला जलाने, राख, वाहनों के प्रदूषण और लकड़ी जलाने के वैज्ञानिक तथ्य पाए गए हैं, उससे टीटीजेड क्षेत्र में लगाए गए प्रतिबंधों की कलई खुल गई है। कोयले के जलाने से हो रहे प्रदूषण के कारण टीटीजेड में उद्योगों पर तदर्थ रोक हटाने की मुहिम को बड़ा झटका लग सकता है। 
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ताजमहल - फोटो : अमर उजाला
ताजमहल को प्रदूषण से बचाने के लिए सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर ताज ट्रिपेजियम जोन अथारिटी का गठन 30 दिसंबर, 1996 को किया गया था। आगरा के कमिश्नर अथॉरिटी के अध्यक्ष बनाए गए। इसमें आगरा, फिरोजाबाद, मथुरा, हाथरस, एटा और भरतपुर जिले का 10,400 वर्ग किमी हिस्सा आता है। ताज को केंद्र मानकर 50 किमी दूरी तक के हिस्से को ताज ट्रिपेजियम जोन का नाम दिया गया।

अब तक ताज पर प्रदूषण के लिए पांच रिपोर्ट आ चुकी हैं। इनमें वरदराजन कमेटी, नीरी, होता कमेटी, संसदीय कमेटी की रिपोर्ट नंबर 262, नीरी-फिरोजाबाद की स्टडी रिपोर्ट हैं। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से कराई गई यह रिपोर्ट छठवीं है, जिसमें स्रोत की जानकारी पहली बार आई है।
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