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आगरा के चारों कोनों पर विराजमान हैं भगवान शिव, सावन के दूसरे सोमवार को होती है परिक्रमा

Fri, 19 Jul 2019 10:50 AM IST
मुकेश कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा Published by: मुकेश कुमार Updated Fri, 19 Jul 2019 10:50 AM IST
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savan 2019 shiv temples of agra
आगरा शहर के मध्य स्थित मनकामेश्वर महादेव मंदिर
आगरा के चारों कोनों पर भगवान शिव के मंदिर स्थापित हैं। मध्य भाग में श्री मनकामेश्वर और रावली महादेव भक्तों की रक्षा कर रहे हैं। सावन के पावन महीने में भगवान महादेव के मंदिरों में भक्तों की भारी उमड़ रही है। सावन के दूसरे सोमवार को इन शिवालयों की परिक्रमा होती है, जो करीब 40 किलोमीटर लंबी है। इस दौरान पूरी ताजनगरी बम-बम भोले के जयकारों से गूंज उठती है। जानिए इन शिव मंदिरों की महिमा... 
savan 2019 shiv temples of agra
सिकंदरा स्थित कैलाश महादेव मंदिर
पांच हजार वर्ष से पुराना है कैलाश महादेव का दरबार

कैलाश महादेव का दरबार पांच हजार वर्ष से भी अधिक पुराना है। यमुना किनारे बने इस मंदिर में दो शिव लिंग स्थापित हैं। मंदिर के महंत के अनुसार कैलाश महादेव की स्थापना भगवान परशुराम और उनके पिता जमद्गिनी द्वारा की गई बताई जाती है। भारत के एकाध मंदिरों में ही दो शिव लिंग स्थापित है। मंदिर से सीधे जाया जाए तो महर्षि परशुराम के पिता का आश्रम रेणुका धाम भी बमुश्किल छह किलो मीटर की दूरी पर स्थित है।
savan 2019 shiv temples of agra
बल्केश्वर महादेव मंदिर
बेल वृक्ष के जड़ से प्राकट्य हैं बल्केश्वर नाथ 

बल्केश्वर नाथ महादेव का दरबार शहर के प्राचीन शिव मंदिरों में से एक है। महंत सुनील कांत नागर के मुताबिक मंदिर का सही नाम बिल्वकेश्वर नाथ महादेव है। यह करीब 700 वर्ष पुराना है। बताया जाता है कि पहले यहां बेल के वृक्षों का जंगल था। बिल्वकेश्वर नाथ महादेव बेल वृक्ष के जड़ से प्राकट्य हैं। इनके दरबार में पहुंचने वाले सच्चे भक्तों की इच्छा पूरी होती है। बाबा के भभूत में बड़ी शक्ति है।
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भगवान पृथ्वीनाथ महादेव
अद्भुत है पृथ्वीनाथ महादेव का दरबार 

प्राचीन पृथ्वीनाथ महादेव का दरबार फतेहपुर सीकरी रोड पर है। पृथ्वीनाथ के मंदिर में कहा जाता है कि यह मंदिर पृथ्वी के गर्भ से अवतरित हुआ था। शताब्दियों पहले खोदाई में अनूठे शिव लिंग सहित इसके चारों खंभे पृथ्वी के गर्भ से निकले थे। मंदिर के पुजारी ने बताया कि उन्होंने अपने पूर्वजों से सुना है कि श्रीकृष्ण जी ने जहां जहां लीला रचाई वहां शिव जी दर्शन को जाते थे। इसलिए पृथ्वीनाथ महादेव की प्रतिमा द्वापर युग की बताई जाती है। इसके बारे में बताया जाता है कि कन्नौज से युद्ध करके लौट रहे पृथ्वीराज चौहान ने यहीं पर रात्रि विश्राम किया था।
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भगवान राजेश्वर महादेव
सैकड़ों वर्ष पुराना है राजेश्वर महादेव मंदिर

राजेश्वर मंदिर का इतिहास करीब 850 से 900 वर्ष पुराना बताया जाता है। इस मंदिर के बारे में बताया जाता है कि राजा खेड़ा का एक सेठ नर्मदा नदी के समीप से बैलगाड़ी से शिव लिंग स्थापित करने के लिए ले जा रहा था। वर्तमान मंदिर स्थल के पास एक कुंआ था, वहां वह विश्राम के लिए रुका। आराम के दौरान उसे शिवजी ने सपना दिखाया कि उनको वहीं स्थापित कर दिया जाए। लेकिन सेठ माना नहीं और शिवलिंग ले जाने की कोशिश करने लगा पर शिवलिंग वहां से हिला नहीं और शिवलिंग को यहीं स्थापित कर दिया गया।
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