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वृंदावन के श्रीराधारमण मंदिर में प्रसाद बनाने के लिए 477 वर्षों से जल रही है भट्टी

Wed, 27 Feb 2019 01:12 PM IST
मुकेश कुमार ऋषि भारद्वाज, अमर उजाला, वृंदावन (मथुरा)
ऋषि भारद्वाज, अमर उजाला, वृंदावन (मथुरा) Published by: मुकेश कुमार Updated Wed, 27 Feb 2019 01:12 PM IST
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radharaman mandir vrindavan history
वृंदावन का श्रीराधारमण मंदिर
वृंदावन में एक मंदिर ऐसा भी है जहां ठाकुर जी की रसोई तैयार करने के लिए पिछले 477 वर्षों से एक भट्टी लगातार जल रही है। सप्त देवालयों में से एक ठाकुर श्रीराधारमण मंदिर में दीपक से लेकर राग-भोग तक में इसका प्रयोग होता है।
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वृंदावन का श्रीराधारमण मंदिर
वर्ष 1515 में वृंदावन आए चैतन्य महाप्रभु ने तीर्थों के विकास के लिए 6 गोस्वामियों को जिम्मेदारी सौंपी। इन्हीं में से एक थे दक्षिण भारत के त्रिचलापल्ली, श्रीरंगम मंदिर के मुख्य पुजारी के पुत्र गोपाल भट्ट गोस्वामी। चैतन्य महाप्रभु के आदेश पर दामोदर कुंड की यात्रा से लाए गए द्वादश ज्योतिर्लिंग की वे वृंदावन में रहकर नृत्य प्रति पूजा करते थे। वर्ष 1530 में चैतन्य महाप्रभु ने गोपाल भट्ट को उत्तराधिकारी बनाया। चैतन्य महाप्रभु की लीला 1533 ई. में पूर्ण हुई। 
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श्रीराधारमण मंदिर में जल रही भट्टी
1542 ई. में नृसिंह चतुर्दशी के दिन गोपाल भट्ट ने सालिगराम शिला के पास एक सांप को देखा, बाद में जब उसे हटाना चाहा तो वह शिला राधारमण के रूप में प्रकट हुई। 1542 ई. में वैशाख पूर्णिमा को इसकी मंदिर में स्थापना की गई। ठाकुर जी की सेवा पूजा के लिए जल एवं अग्नि की आवश्यकता पड़ने पर अरणि से गोपाल भट्ट द्वारा मंत्रों के मध्य अग्नि प्रविष्ट की गई थी। 
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ठाकुर श्रीराधारमण की प्रतिमा
सेवायत श्रीवात्स गोस्वामी ने बताया कि 10 फुट की यह भट्टी दिनभर जलती रहती है। कार्य पूरा होने पर रात को इसमें लकड़ियां डालकर ऊपर से राख उढ़ा दी जाती है जिससे अग्नि शांत न हो। अगले दिन पुन: उसमें उपले व लकड़ी डालकर अन्य भट्टियों को जलाया जाता है।
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वृंदावन का श्रीराधारमण मंदिर
सेवायत आशीष गोस्वामी ने बताया कि रसोई में बाहरी व्यक्ति का प्रवेश पूर्णत: वर्जित माना जाता है। सेवायत के शरीर पर सिर्फ धोती के अलावा और कोई अंग वस्त्र नहीं होना चाहिए। रसोई में एक बार जाने के बाद सेवायत पूरा प्रसाद बनाकर ही बाहर आ सकता है। किसी कारणवश उसे बाहर भी जाना पड़ा तो पुन: स्नान के बाद ही उसे मंदिर की इस रसोई में प्रवेश मिल पाता है।
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