पुलवामा हमले में शहीद आगरा के कहरई गांव के कौशल कुमार रावत की याद में बनाया जा रहा स्मारक अधूरा रह गया। शुक्रवार को शहीद के स्मारक स्थल पर पहली पुण्यतिथि पर न शहीद की मूर्ति है और न ही स्मारक ही बन पाया। प्रशासन के तमाम वादे कागजी ही साबित हुए। शहीद के पिता अपने बेटे का स्मारक जीते जी नहीं देख सके और जनवरी में चल बसे।
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शहीद का परिवार
- फोटो : अमर उजाला
केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) में नायक कौशल कुमार रावत 14 फरवरी 2014 को पुलवामा हमले में शहीद हुए थे। उनके गांव कहरई में जिला प्रशासन और मंत्रियों के आश्वासन के बाद भी विकास कार्य के नाम पर सीमेंटेड सड़क ही बन सकी है, वो भी आधे गांव में। शहीद के भाई कमल किशोर रावत ने बताया कि जिला प्रशासन शहीद के स्मारक के लिए जमीन मुहैया नहीं करा सका। आखिरकार परिवार ने अपनी पैतृक जमीन में स्मारक बनवाने का निश्चय किया।
ग्राम पंचायत निधि से स्मारक बनाने का काम शुरू हो चुका है। आधे से ज्यादा स्मारक बनकर तैयार है, लेकिन इसके दो तरफ की दीवारें बनना शेष हैं। अब पंचायत निधि में धनराशि भी नहीं बची है। शहीद के भाई संजय रावत ने बताया कि यह गांव अब नगर निगम की सीमा में शामिल कर लिया गया है। ऐसे में पंचायत निधि से शायद ही कोई काम हो।
नेताओं ने वादा किया था कि गांव के उच्च प्राथमिक विद्यालय का नाम शहीद कौशल कुमार रावत उच्च प्राथमिक विद्यालय किया जाएगा, लेकिन कुछ नहीं हुआ। शहीद के नाम का द्वार बनेगा, लेकिन नहीं बनाया गया। आगरा विकास प्राधिकरण (एडीए) ने सीमेंटेड रोड बनवाया। लेकिन सांसद और विधायक निधि से एक भी काम गांव में नहीं करवाया गया।
शहीद के परिजन सीआईएसएफ की उनकी बटालियन की मदद से राजस्थान से उनकी साढ़े छह फुट ऊंची मूर्ति बनवा रहे हैं। उनके भाई ने बताया कि मूर्ति लगभग दो लाख रुपये की लागत से बनवाई जा रही है। इसमें भी प्रशासन का कोई सहयोग नहीं रहा है।