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मथुराः पीएफआई फंडिंग मामले की जांच बदली, जमानत के लिए चारों संदिग्धों को नहीं मिले वकील
Mon, 19 Oct 2020 10:06 AM IST
Abhishek Saxena
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मथुरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मथुरा
Published by: Abhishek Saxena
Updated Mon, 19 Oct 2020 10:06 AM IST
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मथुरा पुलिस ने पकड़े चार संदिग्ध
- फोटो : अमर उजाला
पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) और कैंपस फ्रंट ऑफ इंडिया (सीएफआई) के सदस्यों के मददगारों पर पुलिस और खुफिया एजेंसियों ने शिकंजा और कड़ा कर दिया है। विदेशी धनराशि लेकर दंगा फैलाने के मामले की जांच एसएसपी ने निरीक्षक से हटा कर क्षेत्राधिकारी क्राइम को स्थानांतरित कर दी है। खुफिया एजेंसी व पुलिस के दबाव में अभियुक्तों के मददगारों ने अपने कदम पीछे खींच लिए हैं। मामले में जेल में बंद एक पोर्टल के पत्रकार की जमानत कराने भी अभी कोई नहीं आया है।
कोर्ट में आरोपियों की पेशी के दौरान की तस्वीर
- फोटो : अमर उजाला
बता दें कि कि पांच अक्तूबर को हाथरस जाते समय स्विफ्ट कार सवार चार संदिग्धों को मांट थाना पुलिस ने केंद्रीय खुफिया एजेंसी से मिले इनपुट के आधार पर यमुना एक्सप्रेसवे के मांट टोल से पकड़ा था। मांट पुलिस उपनिरीक्षक ने मुकदमा दर्ज कराया, जिसमें उन पर वेबसाइट बनाकर विदेशों से चंदा कर उसका उपयोग दंगा भड़काने और शांति व्यवस्था भंग करने में करने का आरोप लगाया है।
कोर्ट में आरोपियों की पेशी के दौरान की तस्वीर
- फोटो : अमर उजाला
पकड़े गए अतिकुर्रहमान पुत्र रोनक अली निवासी नगला रतनपुरी मुजफ्फरनगर, आलम पुत्र लयीक निवासी घेर फतेर खान निवासी कोतवाली रामपुर, सिद्दीक पुत्र मोहम्मद निवासी चरौर मल्लपुरम केरल और मसूद पुत्र शकील निवासी जरबल रोड बहराइच को जेल भेज दिया था।
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चारों आरोपियों को मथुरा कोर्ट ले जाती पुलिस
- फोटो : अमर उजाला
मामले की शुरुआती जांच मांट पुलिस ने की लेकिन बाद में यह जांच क्राइम ब्रांच को स्थानांतरित हो गई। क्राइम ब्रांच में यह जांच निरीक्षक उत्तमचंद पटेल कर रहे थे, लेकिन एसएसपी डॉ. गौरव ग्रोवर ने पिछले दिनों मथुरा में स्थानांतरित होकर आए सीओ धर्मेंद्र सिंह चौहान को जांच सौंप दी। उन्हें सीओ क्राइम बनाया है।
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न्यायालय जाते पकड़े गए आरोपी
- फोटो : अमर उजाला
पुलिस तथा खुफिया एजेसियों की सख्ती के चलते सीएफआई और पीएफआई के सदस्यों के मददगार आगे नहीं आ पा रहे हैं। 7 अक्तूबर को पोर्टल के पत्रकार सिद्दीक से संबंध रखने वालों ने अधिवक्ता गोपाल गौतम से संपर्क साधा और जमानत अर्जी भी तैयार करवाई। जिस पर अधिवक्ता ने सिद्दीक के हस्ताक्षर भी कराए, परंतु इसके बाद किसी ने संपर्क नहीं साधा। अधिवक्ता ने बताया कि उनके पास अभी तक जमानत के लिए कोई नहीं आया।