मुल्कों के बीच सरहद की दीवार लांघकर पंछी, नदिया और पवन के झोंके मनचाहे स्थान पर पहुंच जाते हैं। सर्दी का मौसम आते ही प्रवासी पक्षी एक दिन में करीब 1000 मील से अधिक की दूरी तय करते हुए चंबल सेंक्चुअरी बाह और इटावा रेंज में पहुंचने लगे हैं।
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Agra: सात समंदर पार से उड़ान भरकर चंबल में पहुंचे प्रवासी पक्षी, लोगों का मनमोह रहीं अठखेलियां
Sat, 19 Nov 2022 05:55 AM IST
मुकेश कुमार
संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा
संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा
Published by: मुकेश कुमार
Updated Sat, 19 Nov 2022 05:55 AM IST
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चंबल में प्रवासी पक्षी
- फोटो : अमर उजाला
पेंटेड स्टॉर्क
- फोटो : अमर उजाला
पेंटेड स्टॉर्क : आकर्षण ऐसा, मनो पेंटर ने भरे हों रंग
हिमालय क्षेत्र से चंबल पहुंचे पेंटेडेड स्टॉर्क (पीली चोंच वाले सारस) का आकर्षण ऐसा है कि मानो किसी पेंटर ने ब्रश से रंग भरे हों। इसका वैज्ञानिक नाम मायक्टेरिया ल्यूकोसेफला है। लंबी, पतली टांग, नुकीली चोंच दूसरे पक्षियों से पेंटेड स्टार्क को अलग करती है। पेंटेड स्टार्क पानी में सात सेमी की गहराई तक घुसकर अपना शिकार पकड़ लेते हैं। इनकी लंबाई औसतन एक मीटर, पंखों का फैलाव औसतन डेढ़ मीटर, वजन 2 से 3.5 किलो होता है।
प्रवासी पक्षी रुडी शेल्डक
- फोटो : अमर उजाला
मनमोह लेती है रुडी शेल्डक की इंद्रधनुषी छटा
यूरोप, एशिया एवं अफ्रीका से चंबल का रुख करने वाली रुडी शेल्डक (ब्रह्मनी डक) की सतरंगी छटा पर्यटकों का मन मोह लेती है। स्थानीय लोग इस चिड़िया को सुरखाब और चकवा-चकवी के नाम से पुकारते हैं। इसका वैज्ञानिक नाम टैडोरना फेरूजीनिया है। अंकुर, कलियां, घास, पत्तियां एवं कीट पतंगे इनका भोजन होते हैं। इनकी लंबाई 60-70 सेमी, वजन 1200-1600 ग्राम होता है। गला सिर तक पीला होता है।
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ग्रे हेरॉन
- फोटो : अमर उजाला
रोमांचित करता है ग्रे हेरॉन के उड़ने का अंदाज
यूरोप, एशिया, अफ्रीका से चंबल पहुंचे ग्रे हेरॉन के उड़ने का अंदाज रोमांचित कर देता है। इनका वैज्ञानिक नाम अर्डिया सिनेरिया तथा स्थानीय नाम भूरा बगुला है। इसके सिर पर मुकुट, गाल, ठुड्डी और गर्दन के किनारे सफेद होते हैं। चोंच लंबी नारंगी और पैर गुलाबी होते हैं। इनकी लंबाई करीब एक मीटर, वजन एक से डेढ़ किलोग्राम, पंख फैलाव 175-200 सेमी होता है। नर-मादा एक जैसे होते हैं, नर मादा के मुकाबले कुछ बडे़ होते हैं।
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व्हिसलिंग टील
- फोटो : अमर उजाला