जम्मू-कश्मीर में ऑपरेशन सीआई रक्षक के दौरान कई आंतकवादियों को मार कर शहीद हुए मथुरा जिले के जवान रामवीर सिंह के परिवार से सरकार ने कई वादे किए, लेकिन 20 साल बाद भी पूरा नहीं किया है। ग्राम पंचायत नैनूपट्टी के नगला सैंदा निवासी रामवीर सिंह 13 अप्रैल, 2000 को जम्मू-कश्मीर में शहीद हो गए थे। उस वक्त प्रदेश और केंद्र सरकार से काफी आश्वासन मिले थे। शहीद के परिजनों ने प्रशासन के समक्ष अपनी मांगें रखी थीं। लेकिन अभी तक गांव में विकास नहीं हुआ। परिजनों ने शहीद के स्मारक का निर्माण भी निजी खर्चे से कराया गया। परिजनों को आज भी सरकारी वादों के पूरे होने का इंतजार है।
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परिजनों ने खुद बनवाया शहीद वीर सपूत का स्मारक, 20 साल बाद भी पूरे नहीं हुए सरकारी वादे
Fri, 24 Jul 2020 12:08 PM IST
मुकेश कुमार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मथुरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मथुरा
Published by: मुकेश कुमार
Updated Fri, 24 Jul 2020 12:08 PM IST
सार
- सैनिक रामवीर सिंह 13 अप्रैल, 2000 को जम्मू-कश्मीर में शहीद हुए थे।
- 20 साल बाद सरकारी वादे नहीं हुए पूरे, निजी खर्चे से बना शहीद स्मारक।
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शहीद रामवीर के स्मारक पर उनके परिवार वाले
- फोटो : अमर उजाला
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शहीद रामवीर सिंह
- फोटो : अमर उजाला
शहीद रामवीर सिंह की पत्नी सुनीता देवी, मां सरोज देवी और पिता सरदार सिंह से इस बारे में बात की गई तो उनकी आखें भर आईं। पिता ने बताया कि मेरा बेटा जब शहीद हुआ था तो जनप्रतिनिधि व प्रशासन ने कई वायदे किए थे। मैंने बेटे की शहादत की याद में गांव में स्मारक निजी खर्चे से बनवाया है। शहीद के परिवारों की कोई सुनने वाला नहीं है। वीरनारी सुनीता देवी ने बताया कि जनप्रतिनिधियों ने गांव के विकास को लेकर तमाम बातें की थी, लेकिन 20 साल बाद भी पहले जैसे हालात हैं।
शहीद रामवीर सिंह का बेटा
- फोटो : अमर उजाला
शहीद पिता का बदला लेने के लिए तैयार हूं: धर्मेंद्र
शहीद रामवीर सिंह के पुत्र धर्मेद्र सिंह 2019 में सेना में भर्ती हुआ है। धर्मेद्र ने बताया कि उनके परिवार की तीन पीढ़ियों ने सेना में रहकर देश की सेवा की है। वो अपने शहीद पिता का समय आने पर बदला अवश्य लेंगे। शहीद के पिता सरदार सिंह और भाई नारायण सिंह, भगवान सिंह ने भी सेना में रहकर देश की सेवा की है।
शहीद रामवीर सिंह के पुत्र धर्मेद्र सिंह 2019 में सेना में भर्ती हुआ है। धर्मेद्र ने बताया कि उनके परिवार की तीन पीढ़ियों ने सेना में रहकर देश की सेवा की है। वो अपने शहीद पिता का समय आने पर बदला अवश्य लेंगे। शहीद के पिता सरदार सिंह और भाई नारायण सिंह, भगवान सिंह ने भी सेना में रहकर देश की सेवा की है।
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गोवर्धन क्षेत्र के विधायक ठाकुर कारिंदा सिंह
- फोटो : अमर उजाला
गोवर्धन क्षेत्र के विधायक ठाकुर कारिंदा सिंह ने कहा कि कोरोना काल खत्म होते हुए मैं गांव सैंदा पहुंच कर शहीद परिवार से मिलूंगा। हर प्रकार की मदद की जाएगी। सरकार की ओेर से भी शहीद पजिनों को मदद दिलाएंगे। शहीद के नाम पर विकास कार्य कराए जाएंगे।
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शहीद की मां, पत्नी-बेटी
- फोटो : अमर उजाला
ये किए थे वायदे
- गांव में शहीद के नाम पर स्कूल का निर्माण।
- गांव में शहीद के नाम पर पार्क और स्मृति द्वार।
- गांव की सड़कें भी शहीद के नाम पर जानी जाएंगी।
- सरकार की ओर से हर प्रकार की योजनाओं से लाभांवित किया जाएगा।
- बच्चों को निशुल्क शिक्षा दिलाई जाएगी।
ये हैं परिवार की मांगें
- शहीद के नाम से गैस एजेंसी या पेट्रोल पंप का आवंटन।
- शहीद के नाम पर गांव में मुख्य द्वार बनाया जाए।
- शहीद स्मारक का सौंदर्यीकरण कराया जाए।
- शहीद के परिवार से किसी एक को सरकारी नौकरी।
- गांव में शहीद के नाम पर स्कूल का निर्माण।
- गांव में शहीद के नाम पर पार्क और स्मृति द्वार।
- गांव की सड़कें भी शहीद के नाम पर जानी जाएंगी।
- सरकार की ओर से हर प्रकार की योजनाओं से लाभांवित किया जाएगा।
- बच्चों को निशुल्क शिक्षा दिलाई जाएगी।
ये हैं परिवार की मांगें
- शहीद के नाम से गैस एजेंसी या पेट्रोल पंप का आवंटन।
- शहीद के नाम पर गांव में मुख्य द्वार बनाया जाए।
- शहीद स्मारक का सौंदर्यीकरण कराया जाए।
- शहीद के परिवार से किसी एक को सरकारी नौकरी।