ब्रज में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का पर्व धूमधाम से मनाया गया। मथुरा में बुधवार रात 12 बजते ही श्रीकृष्ण जन्मस्थान पर कन्हैया का जन्म हुआ। इस दौरान मूसलाधार बारिश हो रही थी। ऐसा दृश्य था मानो इंद्रदेव कान्हा का जलाभिषेक कर रहे हों। ‘नंद के आनंद भयो जै कन्हैया लाल की...’ जयकारे गूंजने लगे। जन्म होते ही ठाकुरजी का पंच गव्य से स्नान किया गया। गाय के दूध से अभिषेक होने के बाद ठाकुरजी का दही, घी, बूरा, शहद और दूध से दिव्य अभिषेक हुआ। पहली बार सरयू के जल से भी श्रीकृष्म का महाभिषेक किया गया। इसके साथ ही कान्हा की नगरी का राम नगरी अयोध्या से विशेष नाता जुड़ गया। यह पहला मौका है, जब भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव बिना भक्तों के मनाया गया। कोरोना के कारण मंदिरों में भक्तों के प्रवेश पर रोक है।
Janmashtami 2020: ब्रज में जन्मे कृष्ण कन्हाई, घर-घर बजी बधाई, पहली बार सरयू के जल से हुआ अभिषेक
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कान्हा का जन्म होते ही मंदिर परिसर के साथ ही ब्रज के घर और गलियां नंद के लाला की जय, यशोदानंदन और देवकीनंदन के जयघोषों से गूंज उठे। हर किसी की चाह थी तो बस अपने आराध्य की एक झलक पाने की, लेकिन यह आस केवल टेलीविजन पर ही पूरी हो सकी। रात्रि में अजन्मे के प्राकट्य के साथ ही महाआरती हुई और ठाकुर जी को मोछर्लासन में विराजमान कर अभिषेक स्थल तक लाया गया।
बुधवार रात्रि 12 बजे राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट और श्री कृष्ण जन्मभूमि न्यास के अध्यक्ष महंत नृत्यगोपाल दास के सानिध्य में श्रीकृष्ण जन्म स्थान सेवा संस्थान के सचिव कपिल शर्मा और सदस्य गोपेश्वरनाथ चतुर्वेदी ने ठाकुर जी का अभिषेक प्रारंभ किया। दूध, दही, शहद, घी, बूरा, गंगा, यमुना और सरयू के पावन सुवासित जल आदि से सेवायतों ने चांदी की 51 किलो की कामधेनु गाय के पयोधरों से आराध्य का पंचामृत अभिषेक कराया।
योगीराज का ब्रज की इस पावन धरा पर जन्मोत्सव मनाया जा रहा था, उधर आसमान से मेघ बरस रहे थे। दोपहर से ही काली घटाओं ने ब्रज के आंगन को ढक लिया था। कड़कड़ाती बिजली के साथ तेज और ठंडी हवाओं ने लोगों को आनंदित किया। कान्हा के भक्त गलियों और सड़कों पर अपने लाडले के आने का इंतजार कर रहे थे, तभी आसमान से मेघ भी जमकर बसरे।