{"_id":"5f32a205fc7b213d722b5d54","slug":"indian-s-first-elephant-memorial-in-mathura","type":"photo-gallery","status":"publish","title_hn":"World Elephant Day 2020: मथुरा में है देश का पहला हाथी स्मारक, 'सीता, लूना, चंपा' की दिलाता है याद","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
World Elephant Day 2020: मथुरा में है देश का पहला हाथी स्मारक, 'सीता, लूना, चंपा' की दिलाता है याद
Wed, 12 Aug 2020 01:17 AM IST
मुकेश कुमार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मथुरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मथुरा
Published by: मुकेश कुमार
Updated Wed, 12 Aug 2020 01:17 AM IST
विज्ञापन
हाथी स्मारक
- फोटो : Wildlife SOS
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
किसी इंसान के मरने के बाद उसकी याद में स्मारक बनाए जाने के बारे में आपने सुना होगा, लेकिन उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले में देश का एकमात्र ऐसा स्मारक है, जो हाथियों की याद में बनाया गया है। यह स्मारक को उन हाथियों की याद में बनाया गया है, जो मानवीय क्रूरता का शिकार हो गए। स्मारक में लगे पत्थरों पर उन हाथियों के नाम और जानकारी अंकित है, जिनकी संरक्षण केंद्र में उपचार के दौरान मौत हो गई थी।
हाथी स्मारक
- फोटो : ANI
दिल्ली-आगरा राष्ट्रीय राजमार्ग पर एक छोटा सा गांव है चुरमुरा। गांव की तो कोई खास पहचान नहीं है, लेकिन वाइल्डलाइफ एसओएस द्वारा हाथी संरक्षण केंद्र बना देने के कारण यह गांव देश-विदेश में जाना जाता है। राष्ट्रीय राजमार्ग से एक किलोमीटर उत्तर में स्थित संरक्षण केंद्र में वर्तमान में 24 हाथी हैं। जिनकी देखरेख की जाती है।
हाथी स्मारक
- फोटो : अमर उजाला
वाइल्डलाइफ एसओएस द्वारा संचालित इस संरक्षण केंद्र में देश का पहला हाथी स्मारक भी बना हुआ है। यहां रेस्क्यू कर लाए कुछ हाथियों की मौत हो गई थी। जिसके बाद संस्था ने उनकी याद में हाथी स्मारक बनवाने का फैसला लिया। यहां बीते साल ही सीता, लाखी, लूना, मोहन, चंपा की याद में हाथी स्मारक बनवाया गया। स्मारक में पांच शिलाखंड लगे हैं, जिन पर इन हाथियों के नाम और जानकारी अंकित है।
विज्ञापन
विज्ञापन
हाथी अस्पताल
- फोटो : Wildlife SOS
बीमार हाथियों के इलाज के लिए अस्पताल भी यहां मौजूद
वाइल्डलाइफ एसओएस ने फरह ब्लॉक के चुरमुरा गांव में हाथी संरक्षण केंद्र की स्थापना 2010 में की थी। बीमार या घायल हाथियों के उपचार के लिए यहां हाथी अस्पताल भी बना हुआ है। संस्था के सह-संस्थापक कार्तिक नारायण बताते हैं कि हाथियों के बीमार होने पर उनके उपचार को लेकर परेशानियों का सामना करना पड़ता था। इसे देखते हुए यहां हाथी अस्पताल खोला गया। यह देश का पहला हाथी अस्पताल है। इसमें दो डॉक्टर और अन्य स्टाफ हर समय हाथियों की देखरेख में मौजूद रहते हैं।
वाइल्डलाइफ एसओएस ने फरह ब्लॉक के चुरमुरा गांव में हाथी संरक्षण केंद्र की स्थापना 2010 में की थी। बीमार या घायल हाथियों के उपचार के लिए यहां हाथी अस्पताल भी बना हुआ है। संस्था के सह-संस्थापक कार्तिक नारायण बताते हैं कि हाथियों के बीमार होने पर उनके उपचार को लेकर परेशानियों का सामना करना पड़ता था। इसे देखते हुए यहां हाथी अस्पताल खोला गया। यह देश का पहला हाथी अस्पताल है। इसमें दो डॉक्टर और अन्य स्टाफ हर समय हाथियों की देखरेख में मौजूद रहते हैं।
विज्ञापन
हाथी संरक्षण केंद्र
- फोटो : Wildlife SOS
इन जगहों से कराए हाथी मुक्त
हाथी संरक्षण केंद्र के इंचार्ज नरेश बताते हैं कि देश के कोने-कोने में वन विभाग के साथ वाइल्डलाइफ एसओएस पीड़ित और गैर कानूनी रूप से बंधक हाथियों को मुक्त कराने का अभियान चलाता है। वो बताते हैं कि पुणे, आंध्र, तमिलनाडु आदि स्थानों से अभी तक कई हाथियों को मुक्त कराया गया है। इनमें पांच हाथियों की मौत हो गई थी। उनकी याद में यहां हाथी स्मारक बना हुआ है। यह देश का एकमात्र हाथी स्मारक है।
हाथी संरक्षण केंद्र के इंचार्ज नरेश बताते हैं कि देश के कोने-कोने में वन विभाग के साथ वाइल्डलाइफ एसओएस पीड़ित और गैर कानूनी रूप से बंधक हाथियों को मुक्त कराने का अभियान चलाता है। वो बताते हैं कि पुणे, आंध्र, तमिलनाडु आदि स्थानों से अभी तक कई हाथियों को मुक्त कराया गया है। इनमें पांच हाथियों की मौत हो गई थी। उनकी याद में यहां हाथी स्मारक बना हुआ है। यह देश का एकमात्र हाथी स्मारक है।