जब से हम आगरा आए हैं, तब से आपके ऊपर बोझ बन गए हैं। आप मेरा खर्चा कब तक उठाओगे। आज के जमाने में आदमी अपने खर्च तक नहीं उठा सकता, दूसरों का क्या उठाएगा। फिर भी आपने बहुत कुछ किया। कब तक यूं ही खाते रहेंगे। सोनू के कमरे से मिले सुसाइड नोट में यही कुछ बाते लिखी हैं। बता दें कि आगरा की आवास विकास कॉलोनी के सेक्टर 10 में रहने वाले सोनू, उसकी पत्नी गीता और आठ साल की बेटी सृष्टि की मौत ने लोगों को झकझोरकर रख दिया है।
मुझे माफ करना: पता है सुसाइड करना अपराध है, पर कब तक हमारा खर्चा उठाओगे, इसलिए एक साथ मरने का फैसला किया
सीओ हरीपर्वत एएसपी सत्यनरायण ने बताया कि घर से जो सुसाइड नोट मिला है। वह ससुर रणधीर को संबोधित किया गया है। उस पर अंगूठा लगा है। इसके नीचे गीता लिखा हुआ है। इससे आशंका है कि बेटी लिखना जानती थी। नोट में जो भाषा लिखी है, वह भी सही नहीं है। इससे यही लग रहा है कि सुसाइड नोट गीता ने यह सृष्टि से लिखवाया है। सुसाइड नोट को विधि विज्ञान प्रयोगशाला भेजकर सृष्टि के हस्तलेख से मिलान कराया जाएगा।
सुसाइड नोट में लिखा है कि मैं काम पर जाने की कहती हूं, लेकिन वो मना कर देते हैं। मरने-मारने की बात करने लगते हैं। झगड़ने लगते हैं। कमरे से बाहर तक नहीं निकलते हैं। बात-बात पर कहते हैं कि खुद को खत्म कर लूंगा। इसलिए एक साथ मरने का फैसला किया। इससे यही लग रहा है कि गीता पति की बेरोजगारी से परेशान थी।
पुलिस के मुताबिक, सुसाइड नोट में लिखा है कि मैंने उन्हें बहुत समझाया, लेकिन वो नहीं समझे। कहते रहे कि काम नहीं करूंगा। तुझे और सृष्टि को नहीं छोड़ सकता। दोनों नहीं मरे तो मैं खुद ही मार दूंगा। जो भी कर रहे हैं अपनी मर्जी से कर रहे हैं। श्याम से भी पूछा, लेकिन उसने मना कर दिया। इसलिए श्याम को छोड़ रहे हैं। उसका ख्याल रखना।
सुसाइड नोट में यह भी लिखा, हमें पता है कि सुसाइड करना अपराध है। फिर भी हम सुसाइड कर रहे हैं। सुसाइड में किसी का भी हाथ नहीं है। अपनी मर्जी से कर रहे हैं। मरना तो एक दिन है, फिर अभी क्यों नहीं। मम्मी मुझे माफ कर देना।