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Agra News: 1966 में आगरा आए थे शिवाजी? सरकारी शिलापट्ट पर गलत जानकारी
Fri, 18 Sep 2020 02:25 AM IST
Abhishek Saxena
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
Published by: Abhishek Saxena
Updated Fri, 18 Sep 2020 02:25 AM IST
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आगरा किले के ठीक सामने स्थित शिवाजी की प्रतिमा
- फोटो : अमर उजाला
शिवाजी महाराज आगरा आए थे 1666 में लेकिन सरकारी शिलापट्ट पर गलत जानकारी दर्ज है कि वह 1966 में आए थे। इतना ही नहीं, शिलापट्ट पर यह भी उल्लेख है कि उन्हें आगरा किले में नजरकैद रखा गया जबकि इतिहासकारों का कहना है कि उन्हें किले में नहीं, फिदाई हुसैन की हवेली में रखा गया। यह शिलापट्ट आगरा किले के ठीक सामने स्थित शिवाजी की प्रतिमा के पीछे की तरफ लगा है। इससे सैलानियों को गलत जानकारी मिल रही है।
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सरकारी शिलापट्ट
- फोटो : अमर उजाला
इतिहासकार राज किशोर राजे ने बताया कि शिलापट्ट पर तिथि और जानकारी दोनों ही गलत है। सही जानकारी यह है कि शिवाजी महाराज अपने दल के साथ 11 मई 1666 को आगरा पहुंचे थे। 12 मई 1666 को उन्हें नजरबंद कर सिद्धी फौलाद खां की निगरानी में रखा गया। 16 मई, को उन्हें रदन्दाज खां के मकान पर ले जाने का आदेश हुआ। इसके बाद फिदाई हुसैन की हवेली में रखा गया, जो कि शहर के बाहर टीले पर स्थित थी। यह स्थान आज कोठी मीना बाजार के नाम से जाना जाता है। इतिहासकार सुगम आनंद ने भी यही बताया कि शिवाजी फिदाई हुसैन की हवेली में कैद रहे थे न कि आगरा किले में।
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शिवाजी के नाम से होगा आगरा का म्यूजियम
- फोटो : अमर उजाला
जहां शिवाजी नजरबंद रहे, उसे अंग्रेजों ने बनाया था गवर्नर हाउस
राज कुमार राजे ने बताया कि एक शोध में यह निष्कर्ष निकला कि फिदाई हुसैन की हवेली यानी कोठी मीना बाजार के टीले पर बने मकान को 1803 में अंग्रेजों ने अपने कब्जे में ले लिया। पुराने जर्जर मकान को तोड़कर 1837 में नई कोठी बनाई गई, जिसे गवर्नर हाउस कहा गया। वर्ष 1857 में जंग-ए-आजादी के समय गवर्नर का आवास सैनिक छावनी में बदल दिया गया। गवर्नर उस कोठी में रहने लगा जिसमें आज मंडलायुक्त आवास है। कोठी मीना बाजार की नीलामी हुई। इसे राजा जयकिशन दास ने खरीदा।
राज कुमार राजे ने बताया कि एक शोध में यह निष्कर्ष निकला कि फिदाई हुसैन की हवेली यानी कोठी मीना बाजार के टीले पर बने मकान को 1803 में अंग्रेजों ने अपने कब्जे में ले लिया। पुराने जर्जर मकान को तोड़कर 1837 में नई कोठी बनाई गई, जिसे गवर्नर हाउस कहा गया। वर्ष 1857 में जंग-ए-आजादी के समय गवर्नर का आवास सैनिक छावनी में बदल दिया गया। गवर्नर उस कोठी में रहने लगा जिसमें आज मंडलायुक्त आवास है। कोठी मीना बाजार की नीलामी हुई। इसे राजा जयकिशन दास ने खरीदा।
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आगरा किला
- फोटो : अमर उजाला
एएसआई अपनी भूल स्वीकार कर चुकी है
एएसआई ने आगरा किले में वाटर गेट के पास 2002 में संरक्षण कराया था। इस पर करीब 45 लाख रुपये खर्च किए गए थे। कहा गया था कि यह वही स्थान है जहां शिवाजी को कैद रखा गया। राजकिशोर राजे ने बताया कि उन्होंने इस पर आपत्ति दर्ज कराई थी। इसके बाद एएसआई ने भूल सुधार करते हुए शिवाजी के आगरा किले में कैद नहीं रहने की बात मानी थी।
एएसआई ने आगरा किले में वाटर गेट के पास 2002 में संरक्षण कराया था। इस पर करीब 45 लाख रुपये खर्च किए गए थे। कहा गया था कि यह वही स्थान है जहां शिवाजी को कैद रखा गया। राजकिशोर राजे ने बताया कि उन्होंने इस पर आपत्ति दर्ज कराई थी। इसके बाद एएसआई ने भूल सुधार करते हुए शिवाजी के आगरा किले में कैद नहीं रहने की बात मानी थी।
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शिवाजी महाराज की प्रतिमा और दूसरे चित्र में शिलापट्ट
- फोटो : अमर उजाला
2001 में हुआ था प्रतिमा का अनावरण
शिवाजी महाराज की प्रतिमा का अनावरण 2001 में हुआ था। उसी के साथ यह शिलापट्ट लगाया था। अनावरण तत्कालीन गृहमंत्री लालकृष्ण आडवाणी ने किया था।
शिवाजी महाराज की प्रतिमा का अनावरण 2001 में हुआ था। उसी के साथ यह शिलापट्ट लगाया था। अनावरण तत्कालीन गृहमंत्री लालकृष्ण आडवाणी ने किया था।