हरियाली तीज के पर्व पर जब ब्रज के लाडले ठाकुर श्रीबांकेबिहारी जी महाराज स्वर्ण हिंडोले में विराजे तो भक्तों में अपने आराध्य को भक्ति की डोर से झुलाने की होड़ लग गई। श्रद्घालुओं के प्रेम का कोई ठिकाना न रहा। हर कोई आराध्य को देख लेने की आशा लिए मंदिर पहुंचा था। भीड़ देख लग रहा था जैसे मंदिर प्रांगण में आस्था का समुद्र उमड़ पड़ा हो।
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बांकेबिहारी मंदिर
- फोटो : अमर उजाला
बुधवार की शाम 4 बजे जैसे ही मंदिर के पट खुले, वैसे ही जयकारों के साथ जन समुद्र मंदिर में प्रवेश कर गया। ठाकुर बांके बिहारी के जयकारों का उद्घोष आस्था के सागर को प्रमाणित कर रहा था। मंदिर में सुगंधित पुष्पों से आ रही भीनी भीनी सुगंध श्रद्घालुओं का मन आनंदित कर रही थी। दर्शन का यह सिलसिला मध्यरात्रि तक अनवरत जारी रहा।
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बांकेबिहारी मंदिर
- फोटो : अमर उजाला
इससे पूर्व दोपहर से ही श्रद्घालुओं की भीड़ उमड़ने लगी थी। पहली झांकी की चाहत लिए मंदिर के बाहर भक्तों के हुजूम ने डेरा डाल दिया था। महिलाएं मंगलगीत और बधाई गाते हुए पट खुलने का इंजतार करती दिखाई दीं।
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बांकेबिहारी मंदिर
- फोटो : अमर उजाला
शाम चार बजे तक मंदिर के सभी प्रवेश गेटों पर भक्त ही भक्त दिख रहे थे। जैसे ही मंदिर के पट खुलते ही श्रद्धालुओं का रेला उमड़ पड़ा। हरे वस्त्र और स्वर्ण आभूषण धारण किए ठाकुरजी भी स्वर्ण हिंडोले में विराज होकर भक्तों को दर्शन दे रहे थे। प्रभु की झलक देखते ही श्रद्धालुओं ने हाथ उठाकर आराध्य के जयकारे लगाए। इस दौरान संपूर्ण वातावरण बांके बिहारी की जयकारों से गुंजायमान रहा।
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बांकेबिहारी मंदिर
- फोटो : अमर उजाला
बता दें कि वर्षभर में सिर्फ एक बार स्वर्ण हिंडोले में भक्तों को दर्शन देने के बाद ठाकुर बांके बिहारी जी महाराज रात 12 बजे आरती के बाद थककर सुखसेज पर विश्राम करते हैं। मंदिर सेवायत रघु गोस्वामी ने बताया कि सुखसेज पर ठाकुरजी सेवा में रजत कलश में जल, पान का बीड़ा, रजत कंघी, आदमकद रजत आइना तथा लड्डू आदि निवेदित किए जाते हैं।