373 साल पहले तामीर किया गया ताजमहल इंजीनियरिंग की बेजोड़ मिसाल है। देश और दुनिया भर के इंजीनियर ताज की वास्तु कला, डिजाइन और मजबूती परखने के लिए आ चुके हैं। भूकंप, बाढ़, तूफान, बिजली गिरने के बाद भी ताज 373 साल से अपनी इंजीनियरिंग के बूते बुलंदी से खड़ा है। ब्रिटिश राज से लेकर अब तक भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण और आईआईटी समेत देशभर के इंजीनियर इसे सहेजने की मुहिम में लगे हुए हैं। इंजीनियर दिवस पर ताजमहल को संरक्षित रखने वाले इंजीनियरों का योगदान इस तरह है।
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इंजीनियर दिवस: इंजीनियरिंग की बेजोड़ मिसाल है ताजमहल, 373 सालों में भूंकप-बाढ़ झेलकर भी बुलंदी से खड़ा है ताज
Wed, 15 Sep 2021 11:35 AM IST
Abhishek Saxena
न्यूज डेस्क अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क अमर उजाला, आगरा
Published by: Abhishek Saxena
Updated Wed, 15 Sep 2021 11:35 AM IST
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ताजमहल
- फोटो : अमर उजाला
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ताजमहल पर सैलानी
- फोटो : अमर उजाला
ताज की नींव में लकड़ी को मिलती रहे नमी
आईआईटी रुड़की से एमटेक प्रो. एससी हांडा ने ताजमहल की नींव और मिट्टी की जांच 2003 में की थी। उनके मुताबिक आबनूस और महोगनी की लकड़ी ताज की नींव में इस्तेमाल की गई है। नमी न मिलने पर उसका लचीलापन प्रभावित होगा। प्रो. हांडा ने ताज के कुआं आधारित नींव में लकड़ी के साथ यमुना किनारे की बाहरी दीवार के बीच लकड़ी के ब्लॉक लगे हुए बताए, ताकि बाढ़ के पानी के टकराने पर ताज सुरक्षित रहे। उनकी जांच में ताज की नींव और मिट्टी बेहतर पाई गई, लेकिन भविष्य के लिए उन्होंने ताज के पास नींव में पानी बरकरार रखने की सिफारिश की थी।
आईआईटी रुड़की से एमटेक प्रो. एससी हांडा ने ताजमहल की नींव और मिट्टी की जांच 2003 में की थी। उनके मुताबिक आबनूस और महोगनी की लकड़ी ताज की नींव में इस्तेमाल की गई है। नमी न मिलने पर उसका लचीलापन प्रभावित होगा। प्रो. हांडा ने ताज के कुआं आधारित नींव में लकड़ी के साथ यमुना किनारे की बाहरी दीवार के बीच लकड़ी के ब्लॉक लगे हुए बताए, ताकि बाढ़ के पानी के टकराने पर ताज सुरक्षित रहे। उनकी जांच में ताज की नींव और मिट्टी बेहतर पाई गई, लेकिन भविष्य के लिए उन्होंने ताज के पास नींव में पानी बरकरार रखने की सिफारिश की थी।
ताजमहल में पर्यटक
- फोटो : अमर उजाला
पहली बार मुल्तानी मिट्टी से चमकाया
तामीर होने के 373 साल में पहली बार ताजमहल को मुल्तानी मिट्टी से चमकाया गया। ताजमहल के पीलेपन को दूर किया केमिकल इंजीनियर एमके भटनागर ने। भटनागर अधीक्षण पुरातत्व रसायनविद के रूप में रसायन शाखा में तैनात हैं। उन्होंने संसदीय कमेटी की सिफारिश के बाद ताजमहल पर मडपैक ट्रीटमेंट शुरू किया। इसके बाद ताजमहल की चारों मीनारें, आर्च, दीवारें और संगमरमरी हिस्से चमक उठे। ताज पर प्रदूषण और गंदे हाथों के कारण जो निशान लगे वह मडपैक ट्रीटमेंट से दूर हो गए।
तामीर होने के 373 साल में पहली बार ताजमहल को मुल्तानी मिट्टी से चमकाया गया। ताजमहल के पीलेपन को दूर किया केमिकल इंजीनियर एमके भटनागर ने। भटनागर अधीक्षण पुरातत्व रसायनविद के रूप में रसायन शाखा में तैनात हैं। उन्होंने संसदीय कमेटी की सिफारिश के बाद ताजमहल पर मडपैक ट्रीटमेंट शुरू किया। इसके बाद ताजमहल की चारों मीनारें, आर्च, दीवारें और संगमरमरी हिस्से चमक उठे। ताज पर प्रदूषण और गंदे हाथों के कारण जो निशान लगे वह मडपैक ट्रीटमेंट से दूर हो गए।
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इंजीनियर दिवस: ताजमहल को सहेजने वाले इंजीनियर
- फोटो : अमर उजाला
गुंबद से मीनारों तक को दी मजबूती
इंजीनियर एमसी शर्मा ने ताजमहल के संरक्षण सहायक से लेकर इंजीनियर तक की जिम्मेदारी निभाई। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण में ताजमहल पर सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का पालन कराने और संरक्षण में उनका महत्वपूर्ण योगदान है।
इंजीनियर एमसी शर्मा ने ताजमहल के संरक्षण सहायक से लेकर इंजीनियर तक की जिम्मेदारी निभाई। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण में ताजमहल पर सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का पालन कराने और संरक्षण में उनका महत्वपूर्ण योगदान है।
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ताजमहल
- फोटो : अमर उजाला
ताज पर संगीतकार यान्नी के शो के दौरान कृत्रिम प्रकाश करने, एत्मादौला पर लाइटिंग करने के वह विरोधी रहे। उनकी राय संस्कृति मंत्रालय तक पहुंची। इसके बाद संगमरमरी स्मारकों पर लाइटिंग के प्रस्ताव निरस्त कर दिए गए। ताजमहल के गुंबद, मीनारों और रॉयल गेट के संरक्षण के काम उनके कार्यकाल के दौरान हुए।
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