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मथुरा: गाय और नंदी की अनूठी शादी, धूमधाम से निकली बरात, जमकर नाचे बराती
Thu, 04 Feb 2021 03:37 PM IST
Abhishek Saxena
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मथुरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मथुरा
Published by: Abhishek Saxena
Updated Thu, 04 Feb 2021 03:37 PM IST
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मथुरा: गाय और नंदी की शादी में नृत्य करती महिलाएं
- फोटो : अमर उजाला
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उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले में बुधवार को अनूठे विवाह का आयोजन किया गया। यह विवाह दो इंसानों का नहीं बल्कि गाय और नंदी (बछड़े) का था। बैंडबाजे के साथ धूमधाम से नंदी (बछड़ा) की बरात आई। गाय के साथ उसके विवाह की सभी रस्में पूरी की गईं। लोगों ने कन्यादान आदि की रस्में पूरी की और दान देकर विदा किया।
नाचते दिखे बराती
- फोटो : अमर उजाला
राया क्षेत्र के गांव थना अमर सिंह में गाय और नंदी का विवाह कराया गया। किला बेसवा निवासी उदयभान सिंह दूल्हा बने नंदी के साथ बरातियों को लेकर थना अमर सिंह पहुंचे। यहां मांट रोड से बैंडबाजे और डीजे के साथ बरात चढ़ाई गई। दूल्हा बना बछड़ा नंदी बग्गी में बैठा था। सड़क पर बराती जमकर नाचे और आतिशबाजी भी हुई। बरात में पिपरौली मांट से गाय भी लाई गई।
नंदी की बरात में शामिल लोग
- फोटो : अमर उजाला
नीमगांव तिराहे से शुरू हुई बरात दो किमी चल कर गांव थना अमर सिंह निवासी बच्चू सिंह फौजी के घर पहुंची। यहां बरातियों का स्वागत किया गया। उपहार का सामान दरवाजे पर रखकर दरवाजे की रस्म हुई।
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नंदी और गाय का कन्यादान करते लोग
- फोटो : अमर उजाला
अनूठा विवाह देखने के लिए लोगों की भीड़ लग गई। बरात का पुष्पवर्षा के साथ कई स्थानों पर स्वागत किया गया। बरात में पूर्व प्रधान पदम सिंह, लाल सिंह, डॉ. रवि माहूर, भूदर सिंह, रामवीर सिंह, नेम सिंह, रमेश सिंह, वासदेव, भूरा, दिगंबर, पंकज, रज्जो आदि शामिल थे।
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नंदी की बरात
- फोटो : अमर उजाला
करोड़ों देवी-देवताओं की उपासना का है मकसद
कार्यक्रम आयोजक गांव थना अमर सिंह निवासी बच्चू सिंह फौजी ने बताया कि विवाह कार्यक्रम के पीछे देवी-देवताओं की पूजा आराधना का मकसद है। गाय में 33 करोड़ देवी-देवताओं का वास है। वह पहले भी दो कन्याओं का विवाह, भागवत सप्ताह और तुलसी-सालिग्राम का विवाह जैसे बड़े कार्यक्रम करा चुके हैं।
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कार्यक्रम आयोजक गांव थना अमर सिंह निवासी बच्चू सिंह फौजी ने बताया कि विवाह कार्यक्रम के पीछे देवी-देवताओं की पूजा आराधना का मकसद है। गाय में 33 करोड़ देवी-देवताओं का वास है। वह पहले भी दो कन्याओं का विवाह, भागवत सप्ताह और तुलसी-सालिग्राम का विवाह जैसे बड़े कार्यक्रम करा चुके हैं।
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