आगरा में कोरोना वायरस का संक्रमण फैलने से बचाने के लिए जगह-जगह सैनिटाइजेशन कर रहे कर्मचारियों के खुद के घरों को अब तक सैनिटाइज नहीं किया जा सका है। फोन आते ही मशीन और केमिकल लेकर दौड़ पड़ने वाले ये कर्मचारी संक्रमण से खुद और अपने परिवार को बचाने के लिए हर जरूरी एहतियात बरत रहे हैं। ये चाहते हैं कि इनके घर में भी सोडियम हाइपो क्लोराइट का छिड़काव कर पोंछा लगाया जाए। इन्हें अफसरों की अनुमति का इंतजार है।
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coronavirus demo
- फोटो : अमर उजाला
मोपिंग और सैनिटाइजेशन की जिम्मेदारी नगर निगम और स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों पर है। इनकी टीमें बनी हुई हैं। थाने से लेकर जोन ऑफिस तक और ब्लाक से लेकर कमिश्नर दफ्तर तक इन्होंने सैनिटाइज किए हैं।
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सैनिटाइजेशन करते कर्मचारी
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शहर में अब तक कोरोना के 63 मरीज मिल चुके हैं। सभी के घरों और आसपास क्षेत्र भी इन्होंने ही जाकर विसंक्रमण (सैनिटाइजेशन ) किया है। इनमें से एक कर्मचारी ने बताया कि वे हाई रिस्क एरिया में जा रहे हैं, लेकिन ड्यूटी करनी है तो करनी है, सोचना क्या? फिर भी अगर उनके घर भी सैनिटाइज होते तो अच्छा रहता। सैनिटाइजेशन का जो कवच वो अन्य लोगों को पहना रहे हैं, यह उन्हें भी मिलना चाहिए।
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मस्जिद को सैनिटाइज करते कर्मचारी
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जमातियों में संक्रमण मिलने के बाद इनका कार्य दोगुना हो गया है। औसतन रोजाना 40-50 स्थानों की मोपिंग कर रहे हैं। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन कर्मचारी संघ के जिलाध्यक्ष महेंद्र यादव का कहना है कि कर्मचारियों की सुरक्षा का भी ध्यान रखना चाहिए। इनके घरों को सैनिटाइज भी कराया जाना चाहिए।
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क्वारंटीन के बाहर कर्मचारी
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मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) डॉ. मुकेश वत्स का कहना है कि सैनिटाइजेशन में लगे कर्मचारियों की सुरक्षा का पूरा ख्याल रखा जा रहा है। उनको मोपिंग के लिए किट, ग्लब्स, विशेष जूते दिए जाते हैं। उनकी रोजाना स्क्रीनिंग भी की जाती है। बचाव के लिए क्या, सावधानी बरतें, इस बाबत भी वो प्रशिक्षित होते हैं। इनके घर अभी तक सैनिटाइज नहीं कराए गए हैं। जरूरत पड़ेगी तो अवश्य कराया जाएगा।