ताजमहल में शाहजहां के तीन दिवसीय 367वें उर्स के दौरान एक लाख से अधिक लोगों के प्रवेश, स्मारक की सुंदरता और सुरक्षा को तार-तार करने का मामला कोर्ट पहुंचा है। आगरा के सीजेएम प्रदीप कुमार सिंह ने प्रार्थना पत्र को परिवाद के रूप में दर्ज कर लिया है। इसमें अधीक्षण पुरातत्वविद डॉ. राजकुमार पटेल, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) के महानिदेशक और एडीए उपाध्यक्ष पर आरोप लगाया गया है। सीजेएम ने वादी के बयान के लिए 16 जून की तिथि नियत की है।
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Taj Mahal: शाहजहां के उर्स में ताज को हुए नुकसान का देना होगा जवाब, सीजेएम कोर्ट में परिवाद दर्ज
Wed, 25 May 2022 12:14 AM IST
मुकेश कुमार
अमर उजाला ब्यूरो, आगरा
अमर उजाला ब्यूरो, आगरा
Published by: मुकेश कुमार
Updated Wed, 25 May 2022 12:14 AM IST
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ताजमहल में शाहजहां का उर्स (फाइल)
- फोटो : अमर उजाला
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ताजमहल में महिला सुरक्षाकर्मी (फाइल)
- फोटो : अमर उजाला
1.25 लाख लोगों की भीड़ ने किया प्रवेश
उमेश चंद वर्मा ने प्रार्थना पत्र में कहा कि सर्वोच्च न्यायालय के आदेश को दरकिनार कर ताजमहल में शाहजहां के 367वें उर्स (27-28 फरवरी और एक मार्च 2022) का आयोजन किया गया। तीन दिवसीय उर्स के लिए ताजमहल में अकीदतमंद कम सैलानी ज्यादा घुस गए। भीड़ को नियंत्रित करने में एएसआई और सीआईएसएफ के सुरक्षाकर्मी नाकाम साबित हुए।
ताजमहल
- फोटो : अमर उजाला
उर्स के अंतिम दिन एक मार्च 2022 को 1.25 लाख लोग ताजमहल में प्रवेश कर गए। भीड़ ने ताजमहल की सुरक्षा एवं सुंदरता को तार-तार कर दिया। फूल और पौधे, गमले, गार्डन, फव्वारे, जालियां, रेलिंग और सब कुछ तहस-नहस कर दिया। सीआईएसएफ के सुरक्षाकर्मियों से भी बदसलूकी हुई। ताजगंज और फतेहाबाद रोड पर भयंकर जाम देर रात तक लगा रहा। ताजमहल के आसपास रहने वाले लोग घरों में बंधक बनकर रह गए। यातायात नियंत्रण करने में पुलिस के भी हाथ पांव फूल गए।
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ताजमहल में उमड़ी थी लाखों की भीड़
- फोटो : अमर उजाला
पुरातत्व संरक्षण अधिनियम में हैं प्रावधान
वादी ने प्रार्थना पत्र में आरोप लगाया कि अधीक्षण पुरातत्वविद आगरा के एक गलत फैसले से ऐतिहासिक इमारत को भारी क्षति पहुंची। तीन दिन तक प्रवेश को निशुल्क कर सरकार को लाखों रुपये के राजस्व की हानि पहुंचाई। पुरातत्व संरक्षण अधिनियम 1958 सभी स्मारकों को उपासना के दुरुपयोग, प्रदूषण और अपवित्रता से संरक्षित करती है। अधीक्षण पुरातत्वविद ने इस अधिनियम की अवहेलना की है। इस अधिनियम की धारा पांच में प्रावधान है कि ऐसे स्मारक या उसके किसी हिस्से का उपयोग किसी भी समुदाय के धार्मिक पूजा या अनुष्ठान के लिए किया जाता है तो कलेक्टर ऐसे स्मारक या उसके हिस्से को प्रदूषण या अपवित्रता से बचाने के लिए उचित प्रावधान करेगा।
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ताजमहल
- फोटो : अमर उजाला
सुप्रीम कोर्ट और शासन के दिशा-निर्देशों का हवाला
समाचार पत्रों के माध्यम से जानकारी मिलने पर उमेश चंद्र वर्मा ने जिलाधिकारी से जांच कराकर मुकदमा दर्ज कराने का आग्रह किया। मगर कोई कार्रवाई न होने पर अदालत में प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किया। अपने प्रार्थना पत्र में ताजमहल को लेकर वर्ष 1970 से 2018 तक सुप्रीम कोर्ट और शासन की ओर से जारी दिशानिर्देश भी वर्णित किए हैं। यह भी कहा कि यूनेस्को ने वर्ष 1983 में ताजमहल को विश्व धरोहर घोषित कर इसे अति उत्तम मानवी कृतियों में से एक बताया था।