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बीएसयूपी योजना: करोड़ों की लागत से बने मकानों की टपक रही छत, हाथ लगाते ही झड़ रहा प्लास्टर

Fri, 14 Aug 2020 01:53 PM IST
Abhishek Saxena न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा Published by: Abhishek Saxena Updated Fri, 14 Aug 2020 01:53 PM IST
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BSUP Scheme: Leaking Roof Of Houses
मकान की छत टपकने से रोकने का इंतजाम करते लोग - फोटो : अमर उजाला
आगरा में 127 करोड़ रुपये की लागत से बनाए गए बेसिक सर्विसेज फॉर अर्बन पुअर ( बीएसयूपी) के मकानों में छत टपक रही है। हाथ लगाते ही प्लास्टर झड़ रहा है। अगर दीवार पर अंगूठे का दबाव डालें तो गड्ढा हो जाता है। इतना ही नहीं, छतों से प्लास्टर हटने के बाद पीली ईंटे नजर आ रही हैं। इसकी शिकायतें मिलने पर एडीए ने जांच टीम बना दी है। एडीए सचिव राजेंद्र प्रसाद त्रिपाठी का कहना है कि बीएसयूपी शास्त्रीपुरम के मकानों से आई लीकेज की शिकायत मिली हैं। इंजीनियरों की टीम मौके पर जाएगी जो कमियां हैं, उन्हें दूर किया जाएगा।
BSUP Scheme: Leaking Roof Of Houses
बीएसयूपी के मकान - फोटो : अमर उजाला
बीएसयूपी केंद्र, प्रदेश सरकार की संयुक्त योजना थी। इसमें 50 प्रतिशत केंद्र सरकार, 40 फीसदी प्रदेश सरकार को और 10 फीसदी रकम लाभार्थी से वसूल की गई है। साल 2009 में बीएसयूपी योजना लांच की गई थी। इस योजना के तहत आगरा में करीब पांच हजार आवास बनाए गए, जिनमें 1360 भवन शास्त्रीपुरम में और 3640 नारायच में बनाए गए। 2012 में काम शुरू हुआ और 2019 में सभी मकान पूरे हो पाए। इनमें से कुछ ब्लॉक 2017 में पूरे हो गए पर आवंटित नही हुए। 

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BSUP Scheme: Leaking Roof Of Houses
मकान का टूटा फर्श दिखातीं महिला - फोटो : अमर उजाला
कांशीराम आवास की हालत और खराब
बीएसयूपी की तरह ही कांशीराम आवासीय योजना के मकान जर्जर हो चुके है। दरवाजे, खिड़कियां तक टूट चुके है। पथौली में 30 करोड़ रुपये की लागत से मकान बनाए गए थे लेकिन आवंटन के बाद भी इनमें लोग रहने नहीं आए। मौजूद समय में 80-90 परिवार ही रह रहे है, जो मलिन बस्तियों से भी बुरे हालात में रह रहे हैं। 
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BSUP Scheme: Leaking Roof Of Houses
मकान की हालत दिखाते लोग - फोटो : अमर उजाला
हमें रेत से बने मकान बनाकर थमा दिए गए हैं। 
जिन पर हाथ लगाने से ही प्लास्टर झड़ने लगता है। छत ऐसी है कि दोनों दिन बारिश में पानी टपकता रहा। अगर छत टपकती रहेगी तो हम लोग कैसे रह पाएंगे। - पुष्पा देवी बीएसयूपी

आवंटित हुए छह महीने नहीं बीते कि यह मकान जर्जर हो गए। यह रेत से बने मकान है, जो ज्यादा दिन नहीं टिक पाएंगे। यह कब गिर जाएंगे इसका डर हमें सता रहा है। - नागेंद्र सिंह, बीएसयूपी  
 
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शास्त्रीपुरम - फोटो : अमर उजाला
बीएसयूपी के इन मकानों में पीली ईट लगी है और छत पर सीमेंट दिखता ही नहीं। बेहद कमजोर मकान बनाए गए हैं। कोई ऐसा घर नहीं है जिसकी छत न टपक रही हो और जिसमें सीलन न आ रही हो। - रंजीत शास्त्रीपुरम
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