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Kumbh Mela 2021: वृंदावन कुंभ से देश-दुनिया में और व्यापक रूप से फैलेगी ब्रज की संस्कृति
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मथुरा-वृंदावन
Published by: मुकेश कुमार
Updated Sun, 07 Feb 2021 12:13 AM IST
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वृंदावन मेला क्षेत्र में बनाई जा रही सड़क
- फोटो : अमर उजाला
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जब-जब हरिद्वार में कुंभ का आयोजन होता है, उससे ठीक पहले श्रीधाम वृंदावन में वैष्णव कुंभ मेला भी लगता है। इस दौरान हजारों संत-महात्माओं के साथ श्रद्धालु भी वृंदावन पहुंचते हैं। यह धार्मिक आयोजन 40 दिनों तक चलता है। इस दौरान हजारों लोगों की मौजूदगी तीर्थनगरी में रहती है। ब्रज के लोगों का कहना है कि यह एक ऐसा धार्मिक आयोजन है, जब ब्रज संस्कृति को देशभर में और व्यापक तरीके से फैलाया जा सकता है।
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वृंदावन कुंभ मेला के लिए बनाया जा रहा मुख्य द्वार
- फोटो : अमर उजाला
वृंदावन कुंभ में कृष्ण प्रिया कालिंदी के तट पर धार्मिक आस्था, भक्ति, विश्वास एवं श्रद्धा से युक्त वैष्णव संत एवं विद्वानों का संगम होता है। श्रद्धालु ब्रज की पावन भूमि पर श्रीकृष्ण के प्रति समर्पण, निकुंज लीला स्थलों के दर्शन की कामना, यमुना स्नान से यम पाश से मुक्ति एवं संतों के दर्शन से मोक्ष की प्राप्ति की लालसा से आते हैं। वृंदावन कुंभ इस बार श्रद्धालुओं की यात्रा को और खास बनाएगा।
मथुरा के शिक्षाविद हरीशंकर दीक्षित ने बताया कि यह आध्यात्मिक संगम ब्रज के लिए बहुउपयोगी साबित हो सकता है। प्रशासन को चाहिए कि इसे सिर्फ साधु-संतों की व्यवस्थाओं तक सीमित न रखें। इसका उपयोग धार्मिक पहचान, यहां की संस्कृति, धरोहर को आम लोगों तक पहुंचाने के लिए करना चाहिए। ऐसे प्रयास मेला के दौरान किए जाएं कि लोग यहां के प्राचीन स्थलों तक पहुंचें।
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वृंदावन
- फोटो : Amar Ujala
वृंदावन के प्रेम महाविद्यालय इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य डॉ. देवप्रकाश शर्मा ने कहा कि सरकार को वृंदावन के सभी प्राचीन भवनों के चित्रों का प्रदर्शन इस तरह करना चाहिए कि भविष्य में उन्हें देखने की लालसा वृंदावन कुंभ बैठक में आने वाले श्रद्धालुओं में उत्पन्न हो। वृंदावन के रास्तों पर प्राचीन इमारतों का प्रदर्शन किया जाए। यह मेला पर्यटन की दृष्टि से वृंदावन ही नहीं संपूर्ण ब्रज के लिए उपयोगी हो सकता है।
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वृंदावन कुंभ: मेला क्षेत्र में पानी की पाइप लाइन बिछाने का होता कार्य
- फोटो : अमर उजाला
वृंदावन स्थित कांच मंदिर के सेवायत हेमकिशोर गोस्वामी ने कहा कि इस कुंभ का आकर्षण सदैव से रहा है। 1950 की कुंभ बैठक के समय भीड़ दिन में ही होती थी, रात के समय नहीं। लेकिन बदलते दौर के साथ यहां आने वाले साधु-संत और भक्तों की संख्या में तेजी के साथ इजाफा हो रहा है। यहां आने वाले लोगों को ब्रज भ्रमण के लिए प्रशासन को प्रेरित करने का काम करना चाहिए।
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