आगरा में वसंत ऋतु के स्वागत के लिए दयालबाग क्षेत्र को मनोहारी ढंग से सजाया जा रहा है। हर ओर वासंती छटा बिखरने लगी है। कॉलोनियों में द्वार बनाकर सजाए जा रहे हैं। घरों की सफाई-सफाई और रंगाई-पुताई चल रही है। घर के सामने और पार्क में रंगोली बनाई जा रही है। उत्सव की तैयारी में घर का प्रत्येक सदस्य लगा हुआ है। दयालबाग क्षेत्र में 14 से 16 फरवरी तक वसंतोत्सव मनाया जाएगा। विभिन्न गतिविधियां होंगी।
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आगरा: पीले वस्त्र देखती युवती
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स्वामी नगर सहित सभी कॉलोनियों, दयालबाग शिक्षण संस्थान, शूटिंग रेंज, प्रेम नगर सभी जगहों पर सजावट की जा रही है। स्वामी नगर में रहने वाली बीटेक की छात्रा डी. स्वाति ने बताया कि वसंतोत्सव के लिए बहुत उत्साह होता है। सामुदायिक सेवा का अवसर मिलता है। इसके साथ नए वर्ष की शुरूआत होती है।
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आगरा: दयालबाग में बनाया गया द्वार
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एमबीए की छात्रा प्रीती ने बताया कि पूरे वर्ष इस बेला का इंतजार किया जाता है। सजावट के माध्यम से अपनी भावनाएं व्यक्त की जाती हैं। एक हफ्ते से पहले से सजावट चल रही है। कक्षा 11 के छात्र मेहर सत्संगी ने बताया कि वसंत से हर नए काम की शुरूआत की जाती है। इसलिए इस उत्सव को यादगार बनाने का प्रयास किया जाता है। रोजी परमार ने कहा कि गुरु महाराज कॉलोनियों का भ्रमण करते हैं, उनके लिए पूरे मनोयोग से सजावट की जाती है।
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स्वामीबाग समाध, दयालबाग
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वसंत राधास्वामी मत के अनुयायियों के लिए प्रमुख उत्सव होता है। वर्ष 1861 को वसंत पंचमी के दिन परम पुरुष पूरन धनी हुजूर स्वामीजी महाराज ने पन्नी गली में सर्व साधारण के लिए सत्संग प्रारंभ किया था और राधास्वामी मत का आरंभ हुआ था। दयालबाग के मीडिया प्रभारी एसके नैयर के मुताबिक यह मत देश व विदेश में बढ़ रहा है और 202 वर्ष पूरा कर चुका है।
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दयालाबाग का प्राचीन मुबारक कुआं
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वसंत के ही दिन 20 जनवरी 1915 को राधास्वामी मत के पांचवें आचार्य परम पूज्य हुजूर महाराज साहब ने मुबारक कुएं के पास शहतूत का पौधा लगाकर दयालबाग कॉलोनी की नींव रखी थी। मुबारक कुआं व शहतूत का पेड़ आज भी संरक्षित है। दयालबाग की नींव रखने के अगले दिन ही शिक्षा की नींव रखी थी। जहां पहले रेत के टीले और झाड़ियां थी, अब 1200 एकड़ भूमि में खेती हो रही है। 200 एकड़ भूमि पर सरसों की खेती है। सरसों के फूल वसंत के आगमन का संदेश दे रहे हैं।