एशिया की सबसे बड़ी घड़ियाल सेंक्च्युरी में शामिल चंबल नदी में आए उफान से घड़ियाल शिशुओं की जिंदगी फिर खतरे में पड़ गई है। चंबल की बाढ़ में सबसे अधिक शिशुओं की मौत होती है। आकलन है कि करीब 40 फीसदी शिशु हर वर्ष बाढ़ में मारे जाते हैं। कुछ मिट्टी युक्त गंदे पानी से अंधे होकर मगरमच्छ और कछुए की कटहवा प्रजाति का निवाला बन जाते हैं। अन्य पचनदा से यमुना में पहुंच जाते हैं और वहां अनुकूल परिस्थितियां नहीं होने पर उनकी मौत हो जाती है। इस साल चंबल सेंक्च्युरी की बाह रेंज में हैचिंग से 2,800 घड़ियाल शिशुओं का जन्म हुआ। पिछले साल 2000 शिशु जन्मे थे। वन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि इनमें से 2 से 5 फीसदी शिशु ही जीवित रह पाते हैं। शिशुओं की मौत का एक मुख्य कारण चंबल नदी में हर साल आने वाली बाढ़ है।
उफान पर चंबल-खतरे में जिंदगी: घड़ियाल के शिशुओं की जान को बाढ़ से खतरा
न्यूज डेस्क अमर उजाला, आगरा
Published by: Abhishek Saxena
Updated Wed, 04 Aug 2021 12:05 AM IST
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