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साल में सिर्फ अक्षय तृतीया के दिन होते हैं भगवान बांके बिहारी के दुर्लभ दर्शन, यह है मान्यता
Sat, 04 May 2019 03:15 PM IST
मुकेश कुमार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वृंदावन (मथुरा)
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वृंदावन (मथुरा)
Published by: मुकेश कुमार
Updated Sat, 04 May 2019 03:15 PM IST
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बांकेबिहारी मंदिर में भक्तों की भीड़
- फोटो : अमर उजाला
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वृंदावन स्थित विश्व प्रसिद्ध बांके बिहारी मंदिर में अपने आराध्य के दर्शन को प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु दर्शन को आते हैं, लेकिन बिहारी जी के दुर्लभ दर्शन साल में सिर्फ दिन ही होते हैं। वो शुभ दिन है अक्षय तृतीया। इस दिन भक्त अपने आराध्य बांके बिहारी के दुर्लभ दर्शन पाने के लिए दूर-दूर से यहां चले आते हैं। इस बार सात मई को अक्षय तृतीया है। मान्यता है कि अक्षय तृतीया के दिन बांके बिहारी के चरण दर्शन करने से भक्तों पर प्रभु की विशेष कृपा बरसती है।
बांके बिहारी मंदिर में सजाया गया फूल बंगला
- फोटो : अमर उजाला
अक्षय तृतीया ऐसा शुभ अवसर है जब ठाकुर बांके बिहारीजी के चरणों के दर्शन होते हैं। दरअसल, पूरे साल बिहारी जी के चरण वस्त्रों और फूलों से ढके रहते हैं। अक्षय तृतीया पर भगवान बांके बिहारी के पूरे शरीर पर चंदन का लेप किया जाता है। इसके लिए दक्षिण भारत से चंदन मंगाया जाता है और उसे महीनों पहले घिसना शुरू कर दिया जाता है।
बांके बिहारी मंदिर
- फोटो : अमर उजाला
चंदन में कपूर, केसर, गुलाबजल, गंगाजल, यमुनाजल और विभिन्न प्रकार के इत्रों को मिलाकर लेप तैयार किया जाता है। अक्षय तृतीया पर श्रृंगार से पहले बांके बिहारी के पूरे शरीर पर चंदन का लेप लगाया जाता है। इस पावन अवसर पर भगवान बांके बिहारी के चरण दर्शन होते हैं। इसी दिन शाम को चरणों के साथ ही भगवान के सर्वांग दर्शन भी होते हैं। अक्षय तृतीया पर बांके बिहारी के दुर्लभ दर्शन पाने के लिए ठाकुरजी के आंगन में आस्था का जनसैलाब उमड़ता है।
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बांकेबिहारी मंदिर में भक्तों की भीड़
अक्षय तृतीया पर बांके बिहारी के चरण दर्शन को लेकर एक कथा प्रचलित है। एक बार मंदिर में बांके बिहारी के चरणों के दर्शन करते हुए एक संत श्रद्धा भाव से भजन गुनगुना रहा था 'बिहारी जी के चरण कमल में नयन हमारे अटके'। पास में ही खड़ा एक व्यक्ति इसे सुन रहा था। उसे भजन अच्छा लगा। वो घर लौटते समय इस भजन को गुनगुनाने लगा, लेकिन वो भगवान की भक्ति में इतना खो गया कि भूलवश भजन उल्टा गाने लगा। वो गा रहा था, 'बिहारी जी के नयन कमल में चरण हमारे अटके'।
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बांके बिहारी
- फोटो : self
व्यक्ति की भक्ति भावना से प्रसन्न होकर बांके बिहारीजी उसके सामने प्रकट हो गए। भगवान ने उससे कहा कि मेरे एक से बढ़कर एक भक्त हैं, लेकिन तुम जैसा कोई नहीं। लोगों के नयन तो हमारे चरणों में अटक जाते हैं परंतु तुमने तो हमारे नयन कमल में अपने चरणों को अटका दिया। पहले तो उस व्यक्ति को कुछ समझ में नहीं आया। बाद में जब उसे अहसास हुआ तो समझ आया कि भगवान केवल भावों के भूखे हैं। मान्यता है कि तब से ही अक्षय तृतीया के दिन बांके बिहारी के चरणों के दर्शन की परंपरा शुरू हुई।