आगरा जिले के बटेश्वर की गलियों में खेलकूद कर बडे़ हुए पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की आज दूसरी पुण्यतिथि है, लेकिन बटेश्वर में अटलजी की यादों का आंगन वीरान पड़ा है। विरासत की उपेक्षा यहां की हर गली-घर को आहत कर रही है। उनसे जुड़ी हुई बटेश्वर का गौरव बढ़ाने वाली दास्तानें आंखों में यशोगान के आंसू भर देती है।
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बटेश्वर में यमुना घाट पर अटल बिहारी वाजपेयी (फाइल)
- फोटो : अमर उजाला
बटेश्वर की गलियों में खेलकूद कर बडे़ हुए पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी जिन घाटों पर यमुना में नहाए, जिस यज्ञशाला में आहुतियां दी, जिस पाठशाला में पढ़े, जिस जंगलात कोठी को फूंककर क्रांति का आगाज किया, वो सब आज उपेक्षित पडे़ हैं।
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अटल बिहारी वाजपेयी
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दो साल पहले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ बटेश्वर के घाट पर अटलजी की अस्थि विसर्जन के लिए आए तो उनसे जुडे़ हुए स्मृति स्थलों के विकास का खाका तैयार हुआ। तब से महज यमुना के घाटों के विकास का काम शुरू हो सका है।
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अटल बिहारी वाजपेयी के पैतृक घर के अवशेष
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पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के भतीजे राकेश वाजपेयी ने बताया कि उनके घर के वीरान पडे़ आंगन के विकसित करने की योजना पर अमल नहीं हो सका है। यज्ञ स्थल उपेक्षित पड़ी है।
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अटल बिहारी वाजपेयी के पैतृक गांव बटेश्वर का रेलवे स्टेशन
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पारिवारिक भाई रमेश वाजपेयी ने बताया कि अटलजी के नाम पर बटेश्वर में स्टेशन नहीं बन सका। पर्यटन कॉम्पलेक्स उजड़ गया। जंगलात कोठी भी जर्जर है। अटलजी की पाठशाला में शिक्षक रहे पुत्तूलाल कहते हैं कि उनकी पाठशाला तक का कायाकल्प नहीं हो सका है।