ताजमहल के नजदीक निर्माणाधीन म्यूजियम अब छत्रपति शिवाजी के नाम से जाना जाएगा। पहले इसका नाम मुगल म्यूजियम प्रस्तावित था, जिसे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बदलने का आदेश दिया है। योगी सरकार के इस फैसले का अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद ने समर्थन किया है। आगरा के इतिहासकारों ने भी इस पर खुशी जताई है।
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अखाड़ा परिषद अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरी
अखाड़ा परिषद अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरी ने कहा कि मुगल हमारे आदर्श नहीं हो सकते। मुगलों ने देश में आतंकवाद फैलाया, वे आतताई थे। छत्रपति शिवाजी के नाम पर ही आगरा के म्यूजियम का नाम रखा जाना उचित है।
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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ
- फोटो : अमर उजाला
महंत नरेंद्र गिरी ने कहा कि मुगलों के नाम पर भारत में कोई चीज नहीं होनी चाहिए, जो भी ऐतिहासिक इमारतें और स्मारक मुगलों के नाम पर है, उनका नाम बदला जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री योगी के इस फैसले के साथ पूरा संत समाज और पूरा देश खड़ा है।
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इतिहासकार सुगम आनंद
- फोटो : अमर उजाला
आगरा के इतिहासकार सुगम आनंद ने कहा कि छत्रपति शिवाजी देश के गौरव हैं। उन्होंने आगरा में ही स्वतंत्र स्वराज का संकल्प लिया था। वह 1666 को अपने बड़े पुत्र संभाजी के साथ आगरा आए थे। तब मुगल बादशाह औरंगजेब ने धोखे से कैद कर लिया था। लेकिन अपने साहस और बुद्धि के दम पर वह हजारों सैनिकों को चकमा देकर यहां निकलने में सफल रहे।
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म्यूजियम की निर्माणाधीन इमारत (फाइल)
- फोटो : अमर उजाला
ताजमहल से 1300 मीटर की दूरी पर 190 करोड़ रुपये की लागत से प्रदेश का पहला प्री-कास्ट म्यूजियम लगभग तैयार है। यह ताजनगरी का चौथा म्यूजियम सबसे अनूठा होगा। इसका नाम अब मुगल म्यूजियम से बदलकर छत्रपति शिवाजी के नाम पर रखा जाएगा। इसमें ताजमहल और आगरा के इतिहास साथ छत्रपति शिवाजी का इतिहास दर्ज होगा।