एससी एसटी एक्ट में बदलाव के विरोध में हुए इस बवाल की तीन वजह मानी जा रही हैं। एक तो बलवाइयों की तैयारी। दूसरा, एलआईयू की नाकामी। तीसरा, पुलिस का देर से जागना। बवाल होने का कोई इनपुट नहीं था, इसलिए पुलिस की ओर से तैयारी नहीं की गई। जब पुलिस एक्शन में आई, तब तक देर हो चुकी थी। भारत बंद का एलान सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद ही कर दिया गया था।
इसके लिए विभिन्न दलित संगठनों की ओर से अपने-अपने क्षेत्र में पंचायत करनी शुरू कर दी गई थी। सूत्रों ने बताया कि पंचायतों में ऐलान किया गया था कि जब भी लोग निकले, लोग एक साथ निकलेंगे। इससे कोई आपका कुछ नहीं कर सकेगा। रविवार को टेढ़ी बगिया, खंदौली, बिजलीघर, जगदीशपुरा, सेवला और देहात के कई इलाकों में पंचायत की गई थीं।
इसका इनपुट एलआईयू के पास नहीं था। यही वजह थी कि सोमवार को उपद्रव हुआ तो पुलिस अधिकारियों को अंदाजा ही नहीं हुआ कि करना क्या है? अधिकारी यही सोचते रह गए कि आखिर इतनी भीड़ कहां से आ गई? लोग आगरा के ही हैं, या फिर बाहर से बुलाए गए हैं? हालांकि एलआईयू अधिकारी दावा कर रहे हैं कि उन्होंने इनपुट दिया था।
लापरवाही यहीं नहीं रही, उपद्रव के बाद जवाबी कार्रवाई करने में देरी दिखाई गई। शहर और देहात में सोमवार सुबह से ही उपद्रव शुरू हो गया था। जब लोग हजारों की संख्या में सड़कों पर निकले तो पुलिस अधिकारी काफी देर बाद हरकत में आए। रावली पर भी एक बस में आ लगा दी गई। कई बार पथराव के बाद अधिकारियों ने जवाबी कार्रवाई की। एलआईयू में सीओ, इंस्पेक्टर और सब इंस्पेक्टर तक है।
एलआईयू की तरफ से कोई इनपुट न होने के कारण प्रशासनिक अधिकारी भी प्रदर्शन को लेकर तैयार नहीं थे। उन्हें सोमवार को सुबह नौ बजे घर से निकलते वक्त तक अंदाजा नहीं था कि हजारों की संख्या में दलित सड़कों पर उतर आए हैं। उपद्रव का तो दूर-दूर तक आभास ही नहीं था।