ताजमहल के पांच सौ मीटर के अंदर किसी भी सांस्कृतिक कार्यक्रम पर सुप्रीम कोर्ट की रोक है, लेकिन आगरा विकास प्राधिकरण (एडीए ) के अफसरों ने ताज व्यू प्वाइंट, महताब बाग पर बुधवार शाम को कांसर्ट कराया, जिसके लिए महताब बाग की बाउंड्री से सटाकर यमुना की तलहटी तक वाटरप्रूफ पंडाल लगाया गया। शाम 5:30 बजे से रात 8 बजे तक इस कांसर्ट में लाउडस्पीकर लगाने के साथ लाइटिंग की गई। जिस व्यू प्वाइंट पर एडीए ने इन्क्रेडिबल ताज कांसर्ट कार्यक्रम किया, वह ताजमहल से महज 315 मीटर दूर है, जबकि संरक्षित स्मारक महताब बाग की दीवार से सटाकर वाटरप्रूफ पंडाल और स्पीकर लगाए गए। सुप्रीम कोर्ट ने 24 मार्च 1998 को यान्नी शो के बाद दिए गए आदेश में स्पष्ट कहा है कि 500 मीटर के बाहर होने वाले कार्यक्रमों के लिए भी पर्यावरण प्रभाव का आकलन और ध्वनि प्रदूषण की जांच के साथ संबंधित विभागों से पूर्व अनुमतियां लेनी होंगी।
अंधेरगर्दी: सुप्रीम कोर्ट की गाइड लाइन का उल्लंघन, ताजमहल के पांच सौ मीटर के दायरे में एडीए ने कराया कांसर्ट
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महताब बाग से ताज का दीदार नहीं कर पाए सैलानी
आगरा विकास प्राधिकरण ने ताजमहल के पार्श्व में व्यू प्वाइंट पर वाटरप्रूफ पंडाल लगाया, जिसके कारण एएसआई संरक्षित स्मारक महताब बाग के अंदर आए सैलानी ताजमहल का दीदार नहीं कर पाए। इसके कारण पर्यटक पूरे दिन परेशान रहे। खासकर शाम को 4 बजे के बाद तो लाउडस्पीकर की तेज आवाज ने पर्यटकों को परेशान किया। ताज देखने के लिए पर्यटकों को महताब बाग में बुर्ज की ओर जाना पड़ा। महताब बाग आई पर्यटक सुनिधि ने बताया कि अष्टकोणीय फव्वारे की ओर से ताज का दीदार नहीं हो सका। पर्यटकों ने ताजमहल से शाम के समय इस कार्यक्रम की लाइटिंग और साउंड के फोटो और वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर अपलोड किए।
23 साल से नहीं हुआ कोई कार्यक्रम
ताजमहल पर यान्नी शो के बाद यमुना की तलहटी में सारेगामा शो हुआ, जो 11 सीढ़ी की तरफ 600 मीटर दूरी पर किया गया था। उसके बाद से 23 साल से ताजमहल के 500 मीटर दायरे में कोई सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं किया गया। इन दो दशकों में पर्यटन उद्यमी महताब बाग में सांस्कृतिक कार्यक्रम करने की मांग उठाते रहे, पर केंद्र सरकार का संस्कृति और पर्यटन मंत्रालय सुप्रीम कोर्ट से अनुमति लेने को तैयार नहीं हुआ। पर्यटन संगठनों की इस मांग को संस्कृति मंत्रालय नकारता रहा है।
यान्नी के शो के बाद ही ताज पर लाइटिंग की रोक
संगीतकार यान्नी के शो के दौरान ताज पर कीड़े जमा हो गए थे। तेज रोशनी में कीड़ों के स्राव करने से संगमरमर पर जो दाग लगे, उसकी रसायन शाखा की रिपोर्ट के बाद ही यहां लाइटिंग पर रोक लगा दी गई। उसके बाद किसी कार्यक्रम में ताज पर लाइटिंग नहीं की गई। पूर्व में कमिश्नर प्रदीप भटनागर के कार्यकाल के दौरान एलईडी लाइटिंग का प्रयास किया गया, लेकिन एएसआई के तत्कालीन इंजीनियर एमसी शर्मा द्वारा सुप्रीम कोर्ट के आदेश की जानकारी दिए जाने के बाद प्रस्ताव रद्द कर दिया गया।
सुप्रीम कोर्ट ने लगा रखी है रोक
यान्नी शो के बाद सुप्रीम कोर्ट ने ताजमहल के 500 मीटर के अंदर किसी भी सांस्कृतिक कार्यक्रम के आयोजन पर रोक लगा दी थी। उसके बाद एएसआई, पर्यावरण, प्रदूषण की कमेटी बनाई गई थी, जिसने 500 मीटर के बाहर भी 40 डेसिबल तक ध्वनि पर सहमति दी थी। ताज के बाहर 500 मीटर दायरे में कोई कार्यक्रम नहीं किया जा सकता। - पीवीएस सेंगर, तत्कालीन अधीक्षण पुरातत्वविद, अब रिटायर्ड