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Fake Apps Sign: गूगल प्ले स्टोर पर असली और फेक सरकारी एप्स को कैसे पहचानें? ये 3 निशान बताते हैं सच

Sat, 13 Jun 2026 01:11 PM IST
Shikhar Baranawal यूटिलिटी डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
यूटिलिटी डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Shikhar Baranawal Updated Sat, 13 Jun 2026 01:11 PM IST
सार

Google Play Store Scams: अक्सर लोग प्ले स्टोर से सरकारी एप के नाम पर उससे मिलता जुलता किसी फर्जी एप को डाउनलोड कर लेते हैं। ऐसे में उनके साथ फ्रॉड होने की आशंका कई गुना बढ़ जाती है। इसलिए आइए इस लेख में समझते हैं कि असली और फर्जी एप्स की पहचान कैसे करें?

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Spot Fake Government Apps on Google Play Store: These 3 Signs Reveal the Truth know in hindi
प्ले स्टोर पर नकली एप की पहचान कैसे करें? - फोटो : AI

Spot Fraud Apps Mobile: आज के डिजिटल युग में सरकारी योजनाओं का लाभ उठाने, बिलों का भुगतान करने या दस्तावेज डाउनलोड करने के लिए हम अक्सर मोबाइल एप्स की मदद लेते हैं। गूगल प्ले स्टोर पर कई सरकारी एप्स मौजूद हैं, लेकिन इसी का फायदा उठाकर साइबर क्रिमिनल्स ने कुछ हूबहू दिखने वाले फर्जी एप्स भी बना लिए हैं।



इन नकली एप्स को डाउनलोड करने से आपका व्यक्तिगत डेटा की चोरी या आपका बैंक खाता तक खाली हो सकता है। इसलिए किसी भी एप को डाउनलोड करने से पहले सावधानी बरतना बहुत जरूरी है। आइए इस लेख में तीन जरूरी बातों के बारे में जानते हैं जो आपको असली और नकली एप की पहचान करने में मदद कर सकते हैं।

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डेवलपर का नाम और प्रामाणिकता जांचें - फोटो : अमर उजाला
डेवलपर का नाम और प्रामाणिकता जांचें
  • प्ले स्टोर पर एप के नाम के ठीक नीचे डेवलपर का नाम लिखा होता है। असली सरकारी एप्स के नीचे हमेशा संबंधित मंत्रालय, राज्य सरकार या 'नेशनल इंफॉर्मेटिक्स सेंटर (NIC)' लिखा होगा।
  • एप की डिटेल्स में दिए गए डेवलपर के ईमेल और वेबसाइट को चेक करें। सरकारी वेबसाइट्स के अंत में हमेशा '.gov.in' या '.nic.in' होता है।
  • अगर किसी सरकारी योजना के एप का डेवलपर कोई प्राइवेट लिमिटेड कंपनी या किसी व्यक्ति का नाम (जैसे- @gmail.com) दिख रहा है, तो वह 100% फर्जी एप है।
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एप द्वारा मांगी जाने वाली अनचाही परमिशन - फोटो : Google

एप द्वारा मांगी जाने वाली अनचाही परमिशन

  • असली सरकारी एप्स सिर्फ वही परमिशन मांगते हैं जो उनके काम के लिए जरूरी हैं, जैसे लोकेशन या कैमरा।
  • अगर कोई साधारण सरकारी योजना की जानकारी देने वाला एप आपके फोन के कॉन्टैक्ट्स, पर्सनल मैसेज या गैलरी की परमिशन मांगता है, तो तुरंत संभल जाएं।
  • ये नकली एप्स परमिशन मिलते ही आपके फोन का पूरा एक्सेस स्कैमर्स को भेज देते हैं, जिससे आपके नेट बैंकिंग के ओटीपी भी हैक हो सकते हैं।

 

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एप डाउनलोड की संख्या और रिव्यू का गणित - फोटो : Freepik

एप डाउनलोड की संख्या और रिव्यू का गणित

  • आधिकारिक सरकारी एप्स (जैसे Aadhaar, उमंग, या डिजिलॉकर) को करोड़ों लोग इस्तेमाल करते हैं। अगर किसी एप के डाउनलोड्स सिर्फ कुछ हजार या लाख हैं, तो वह संदिग्ध हो सकता है।
  • इसके अलावा एप के कमेंट्स को ध्यान से पढ़ें। अगर एप नकली होगा, तो कमेंट सेक्शन में लोगों ने 'फर्जी एप', 'फ्रॉड' या 'काम नहीं कर रहा' जैसे रिव्यू जरूर लिखे होंगे।
  • कई बार स्कैमर्स पैसे देकर फर्जी पॉजिटिव रिव्यू लिखवाते हैं, इसलिए सिर्फ स्टार रेटिंग देखने के बजाय लिखित कमेंट्स पर ज्यादा भरोसा करें।

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फर्जी एप्स से बचने के लिए क्या करें? - फोटो : Adobe Stock

फर्जी एप्स से बचने के लिए क्या करें?

  • किसी भी एप को सीधे प्ले स्टोर पर खोजने के बजाय, संबंधित मंत्रालय की ऑफिशियल सरकारी वेबसाइट पर जाएं और वहां दिए गए लिंक से एप डाउनलोड करें।
  • अपने फोन में गूगल प्ले प्रोटेक्ट फीचर को हमेशा एक्टिव रखें, यह फोन में मौजूद हानिकारक और फर्जी एप्स को स्कैन करके तुरंत हटा देता है।
  • अपने स्मार्टफोन में एक अच्छा सुरक्षा सॉफ्टवेयर रखें और किसी भी अनजान लिंक या वॉट्सएप मैसेज के जरिए भेजे गए एप को इंस्टॉल न करें।
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