साइबर हमले को लेकर भारत में नहीं है कोई कानून, चाइनीज हैकर्स से कैसे निपटेंगे हम

हाल ही में चाइनीज हैकर्स ने भारत में वैक्सीन निर्माता कंपनी सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (एसआईआई) और भारत बायोटेक पर साइबर अटैक करने की कोशिश की है। साइबर इंटेलिजेंस फर्म साइफर्म (Cyfirma) ने अपनी एक रिपोर्ट में इसका दावा किया था। गोल्डमैन सैक्स समर्थित सिंगापुर और टोक्यो बेस्ड साइबर सुरक्षा कंपनी साइफर्म ने कहा कि चाइनीज हैकिंग ग्रुप एपीटी-10 (APT10) ने भारत बायोटेक और दुनिया की सबसे बड़ी वैक्सीन कंपनी सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया के आईटी सिस्टम और आपूर्ति श्रृंखला सॉफ्टवेयर के बीच अंतराल और इसकी कुछ कमजोरियों का पता लगाया था। बता दें कि इस हैकिंग ग्रुप को स्टोन पांडा के नाम से भी जाना जाता है। आइए जानते हैं चीन साइबर अटैक को कैसे अंजाम देता है और भारत के पास इससे बचने के क्या तरीके हैं...

आपको एक साल पीछे ले चलते हैं। आपको याद होगा कि पिछले साल जून में गलवान में भारत और चीन के सैनिकों के बीच झड़प हुई थी और ठीक उसके चार महीने बाद यानी अक्तूबर 2020 में मुंबई एक बड़े हिस्से की पावर ग्रिड फेल हो गई है और अंधेरा छा गया। बाद में कई रिपोर्ट में दावा किया गया कि ग्रिड फेल होने के पीछे चाइनीज हैकर्स का हाथ था। अमेरिका की मैसाचुसेट्स स्थित साइबर सिक्योरिटी कंपनी रिकॉर्डेड फ्यूचर ने अपनी एक रिपोर्ट में कहा था कि चाइनीज सरकार समर्थित हैकर्स के एक ग्रुप ने मैलवेयर के जरिए मुंबई में पावर ग्रिड को निशाना बनाया था। बता दें कि रिकॉर्डेड फ्यूचर एक साइबर सिक्योरिटी कंपनी है जो विभिन्न देशों के इंटरनेट का इस्तेमाल कर उनका अध्ययन करती है।

सरकार ने किया इनकार
पावर ग्रिड फेल होने के पीछे चीन का हाथ होने की रिपोर्ट पर केंद्रीय ऊर्जा मंत्री आरके सिंह ने कहा कि सरकार के पास ऐसा कोई सबूत नहीं है जिससे ये साबित होता हो कि अक्तूबर 2020 को मुंबई में पावर ग्रिड फेल होने के पीछे चीन या किसी अन्य देश के हैकर्स का हाथ हो। उन्होंने कहा कि चीन भी इसे निश्चित रूप से इसे नहीं मानेगा। मुंबई में पावर ग्रिड फेल होने के कारण कई जिले की बिजली खत्म हो गई थी और रेल गाड़ियों के पहिए भी थम गए थे।